मुख्यमंत्री ने कानपुर मंडल के जनप्रतिनिधियों संग की विशेष संवाद बैठक

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लखनऊ{ गहरी खोज }: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को अपने सरकारी आवास पर कानपुर मंडल के विधायकों के साथ एक विशेष संवाद बैठक की। यह बैठक केवल विकास परियोजनाओं की समीक्षा का मंच नहीं थी, बल्कि यह लोकतंत्र की उस जीवंत परंपरा का प्रमाण थी, जिसके तहत शासन और जनता के बीच की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी ‘जनप्रतिनिधियों’ के माध्यम से मुख्यमंत्री जन आकांक्षाओं से मुखातिब हो रहे थे। मुख्यमंत्री द्वारा प्रारंभ की गई मंडलवार संवाद शृंखला की कड़ी में इस बार कानपुर मंडल के छह जनपदों (कानपुर नगर, कानपुर देहात, फर्रुखाबाद, कन्नौज, इटावा और औरैया) के जनप्रतिनिधियों को आमंत्रित किया गया था।
मुख्यमंत्री ने संवाद की शुरुआत प्रत्येक सांसद एवं विधायक से सीधे संवाद करते हुए की। उन्होंने उनके निर्वाचन क्षेत्रों की जमीनी परिस्थितियों, जन अपेक्षाओं, विकास कार्यों की प्रगति और प्रशासनिक समन्वय पर विस्तार से फीडबैक प्राप्त किया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के सतत और संतुलित विकास में कानपुर मंडल की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह मंडल राज्य की औद्योगिक और शैक्षिक रीढ़ तो है ही, साथ ही साथ यह सांस्कृतिक विविधता, ऐतिहासिक चेतना और जनप्रतिनिधियों की प्रतिबद्धता का भी केन्द्र है।
बैठक में लोक निर्माण विभाग द्वारा मंडल के छह जिलों में जनप्रतिनिधियों द्वारा प्रस्तावित कुल 1,362 निर्माण कार्यों की विस्तृत समीक्षा प्रस्तुत की गई, जिनकी अनुमानित लागत 10,914 करोड़ रुपये आंकी गई है। इन कार्यों में सड़कों, पुलों, फ्लाईओवरों, बाईपासों, इंटर-कनेक्टिविटी, मिसिंग लिंक रोड, सिंगल कनेक्टिविटी, धार्मिक स्थलों के विकास, सुरक्षा तथा लॉजिस्टिक्स से जुड़े महत्वपूर्ण प्रस्ताव सम्मिलित हैं। इनमें सबसे अधिक कार्य कानपुर नगर में प्रस्तावित किए गए हैं, जहां 5,006 करोड़ रुपये की लागत से 426 योजनाएं प्रस्तुत हुई हैं। फर्रुखाबाद में 2,476 करोड़ रुपये की लागत से 308 कार्य, कानपुर देहात में 1,214 करोड़ रुपये के 336 कार्य, कन्नौज में ₹1,076 करोड़ के 98 कार्य, इटावा में 620 करोड़ रुपये के 128 कार्य और औरैया में 524 करोड़ रुपये लागत से 66 विकास प्रस्ताव सम्मिलित हैं।
मुख्यमंत्री ने लोक निर्माण विभाग को निर्देशित किया कि संबंधित जनप्रतिनिधियों से विमर्श कर प्रस्तावित कार्यों की प्राथमिकता तय की जाए और समयबद्ध ढंग से कार्यों की शुरुआत सुनिश्चित की जाए। उन्होंने इन परियोजनाओं को केवल सरकारी खर्च का विवरण न मानते हुए उन्हें ‘जनता के विश्वास की पूंजी’ बताया। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि जनप्रतिनिधियों द्वारा प्राथमिकता प्राप्त योजनाओं को शीघ्र स्वीकृति प्रदान की जाए, उनका पारदर्शी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए और सतत निगरानी के माध्यम से समयबद्ध पूरा किया जाए। मुख्यमंत्री ने नगर विकास विभाग को निर्देशित किया कि नगर विकास विभाग द्वारा कराए जा रहे विकास कार्यों से संबंधित शिलापट्ट पर स्थानीय जनप्रतिनिधि के नाम अंकित किया जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने बैठक के दौरान यह भी कहा कि जनप्रतिनिधि जनता और शासन के बीच की सबसे भरोसेमंद कड़ी होते हैं। उनके विचार और सुझाव केवल संवाद का माध्यम नहीं हैं, बल्कि वे जन आकांक्षाओं का स्वरूप होते हैं, जिन्हें योजनाओं की संरचना और क्रियान्वयन में सक्रिय रूप से सम्मिलित किया जाना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से अपेक्षा की कि वे जनप्रतिनिधियों के अनुभवों और फील्ड इनपुट्स को केवल दस्तावेज़ी स्तर पर न लें, बल्कि उन्हें नीति निर्धारण का सजीव आधार बनाएं।
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कानपुर मंडल को ‘विकास का अग्रदूत’ करार देते हुए विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में यह मंडल न केवल उत्तर प्रदेश, बल्कि पूरे देश के लिए एक प्रेरणास्पद मॉडल के रूप में उभरेगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार मंडल की औद्योगिक विरासत, शैक्षिक संपन्नता और सांस्कृतिक चेतना को आधुनिक विकास की दिशा में ले जाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता और समर्पण के साथ कार्य कर रही है।

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