उर्वरक संकट पर सरकार विफल, पीएम‑प्रणाम योजना निष्प्रभावी : पवन खेड़ा

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नई दिल्ली{ गहरी खोज }: कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर खरीफ सीजन में 390.54 लाख मीट्रिक टन उर्वरक की आवश्यकता के बावजूद मौजूदा भंडार सिर्फ 51 प्रतिशत मांग को ही पूरा कर पाने का आरोप लगाया है। पार्टी ने कहा कि सरकार की पीएम‑प्रणाम योजना तीन साल पूरे होने के बाद भी निष्प्रभावी साबित हुई है।
कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष पवन खेड़ा ने मंगलवार को एक्स पोस्ट में कहा कि केंद्र सरकार द्वारा 2023 में शुरू की गई पीएम‑प्रणाम योजना के तहत इस साल तक किसी भी राज्य या केंद्रशासित प्रदेश को एक भी प्रोत्साहन राशि नहीं दी गई। इस कारण कोई ठोस प्रगति नहीं हुई और किसान अब भी आयातित रासायनिक उर्वरकों पर निर्भर हैं।
खेड़ा ने प्रधानमंत्री की अपील पर सवाल उठाते हुए कहा कि किसानों से रासायनिक उर्वरक उपयोग 50 प्रतिशत घटाने को कहना व्यावहारिक नहीं है। किसान अचानक आधी जमीन की खेती बंद नहीं कर सकते और न ही वैकल्पिक प्रणालियों पर तुरंत शिफ्ट हो सकते हैं, खासकर तब जब सरकार ने अपनी ही योजना को धन और समर्थन से वंचित रखा है।
कांग्रेस नेता ने कहा कि परिवर्तन के लिए योजना, निवेश, वैज्ञानिक सहयोग और संस्थागत प्रतिबद्धता जरूरी है, लेकिन सरकार केवल मीडिया और पीआर अभियानों तक सीमित है। किसान भारत की कार्यबल का 46.1 प्रतिशत हिस्सा हैं और कृषि सकल घरेलू उत्पाद में लगभग 18 प्रतिशत योगदान देती है। ऐसे में यदि सरकार इस अहम वर्ग के लिए गंभीर योजना नहीं बना रही है तो यह सवाल उठता है कि आखिर सरकार किसके लिए योजना बना रही है।
उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री ने 10 मई को हैदराबाद में एक कार्यक्रम के दौरान पश्चिम एशिया युद्ध और वैश्विक संकट के बीच देशवासियों से पेट्रोल-डीजल बचाने, विदेशी यात्राएं टालने, सोने की खरीद कम करने और स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग को बढ़ावा देने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और सप्लाई चेन संकट के कारण पूरी दुनिया में ईंधन और उर्वरकों की कीमतें कई गुना बढ़ चुकी हैं। केंद्र सरकार देशवासियों पर बोझ कम करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है, लेकिन अब नागरिकों को भी अपने कर्तव्यों को प्राथमिकता देनी होगी।

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