एक सशक्त भारत वही है, जहां आपदा में जीवन की रक्षा सुनिश्चित होः राजनाथ सिंह

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नई दिल्ली{ गहरी खोज }: एक सशक्त भारत वही है, जहां सीमाएं सुरक्षित हों, समुदाय आत्मविश्वासी हों और आपदा के समय हर जीवन की रक्षा सुनिश्चित हो। यह बात शुक्रवार को रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कही। उन्होंने कहा कि आज जब हम समस्त भारत के सशक्तिकरण और सुरक्षा की बात करते हैं, तो यह केवल सीमाओं की रक्षा तक सीमित नहीं रह जाती, बल्कि यह हमारे समाज, हमारे पर्यावरण और हमारे नागरिकों की सुरक्षा से भी जुड़ जाती है।
तिरंगा माउंटेन रेस्क्यू टीम पर्वतीय और हिमस्खलन प्रभावित क्षेत्रों में बचाव कार्य को अंजाम देती है। टीम भारतीय सेना के साथ मिलकर दुर्गम इलाकों में राहत, बचाव और प्रशिक्षण का कार्य भी करती है। तिरंगा माउंटेन रेस्क्यू की समर्पित सेवा के 10 वर्ष पूरे होने पर नई दिल्ली स्थित मानेकशॉ सेंटर में उनकी एक फोटो प्रदर्शनी आयोजित की गई थी। इसका शीर्षक ‘राष्ट्र की निशब्द सेवा का एक दशक’ था। प्रदर्शनी में देश के दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों में तिरंगा माउंटेन रेस्क्यू के अभियान से जुड़ी प्रभावशाली तस्वीरें प्रदर्शित की गईं।
इन तस्वीरों में संगठन के स्वयंसेवकों के साहस, धैर्य और उनके प्रयासों से प्रभावित लोगों के जीवन की झलक दिखाई गई। राजनाथ सिंह ने यहां टीम के सदस्यों को संबोधित किया। रक्षा मंत्री का कहना था कि हमें यह समझना होगा कि हिमालय की सुरक्षा और हिमालय में मानव जीवन की सुरक्षा, दोनों एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं। यदि हमारे सीमावर्ती क्षेत्र सुरक्षित, समृद्ध और आत्मविश्वासी होंगे, तभी हमारी सीमाएं भी सुदृढ़ होंगी। इसलिए तिरंगा माउंटेन रेस्क्यू जैसे संस्थानों का कार्य केवल बचाव तक सीमित नहीं है।
उन्होंने तिरंगा माउंटेन रेस्क्यू टीम से कहा कि आप अप्रत्यक्ष रूप से बॉर्डर स्टेबिलिटी, कम्युनिटी कॉन्फिडेंस और देश की दृढ़ता को भी मजबूत कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हिमालय जैसे दुर्गम और संवेदनशील क्षेत्र में, तिरंगा माउंटेन रेस्क्यू केवल रेस्क्यू ऑपरेशन तक सीमित नहीं है। बल्कि यह टीम हमारी सेनाओं का सपोर्ट, स्थानीय समुदायों का विश्वास और राष्ट्रीय दृढ़ता का मजबूत स्तंभ भी है।
रक्षामंत्री ने बताया कि तिरंगा माउंटेन रेस्क्यू ने ऊंचे दुर्गम पहाड़ी इलाकों में आपदा बचाव के क्षेत्र में, विश्वस्तरीय ट्रेनिंग और अपने व्यावहारिक ज्ञान को जमीन पर उतारा है। तिरंगा माउंटेन रेस्क्यू ने केवल एक सहायक के तौर पर अपनी भूमिका नहीं निभाई, बल्कि सेना की ताकत और प्रभाव को कई गुना बढ़ाने का काम किया है। तिरंगा माउंटेन रेस्क्यू के लोग वो हैं, जिनकी उपस्थिति हमारी सेनाओं को संबल प्रदान करती हैं।
हमारे जवान सरहद पर हर तरह की मुश्किलें झेलते हैं। कभी-कभी तो प्रकृति भी उनके सामने एक दुश्मन की तरह खड़ी हो जाती है। ऐसे में ये माउंटेन रेस्क्यू ही हैं, जो अपनी जान जोखिम में डालकर उन्हें सुरक्षित निकालते हैं। रक्षामंत्री ने बताया कि अब तो तिरंगा माउंटेन रेस्क्यू में सिविलियन भी शामिल हो गए हैं। उन्होंने कहा कि कोई ट्रैकर हो, कोई लोकल हो या कोई वर्कर हो, हर किसी के लिए तिरंगा माउंटेन रेस्क्यू की टीम हमेशा तत्पर रहती है। ये सेवा भाव ही है, जो तिरंगा माउंटेन रेस्क्यू को अलग बनाता है।
रक्षामंत्री ने कहा कि आज हमारी सेना, एनडीआरएफ और विभिन्न कमांड के साथ एमओयू के माध्यम से तिरंगा माउंटेन रेस्क्यू भारत के प्रमुख, एवलांच रैस्क्यू इंस्टीट्यूशन में गिना जाता है। उन्होंने कहा कि वह यह कहना चाहेंगे कि माउंटेन रेस्क्यू टीम की वास्तविक उपलब्धि आकड़ों से भी बड़ी है। इस टीम ने लोगों में विश्वास जगाया है। रेस्क्यू टीम ने सैनिकों का मनोबल बढ़ाया है।हिमालयी क्षेत्र में रहने वाले, समुदायों को यह एहसास कराया है, कि वे अकेले नहीं हैं। रक्षामंत्री ने कहा कि बचाव सिर्फ जीवन बचाना भर नहीं है, बल्कि लोगों के विश्वास को पुनर्जीवित करना है।

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