स्कूल मैनेजमेंट कमेटी के दिशानिर्देश जारी, विद्यालय प्रबंधन की होगी जिम्मेदारी

0
T20260506208511

नई दिल्ली{ गहरी खोज }: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बुधवार को नई दिल्ली में स्कूल मैनेजमेंट कमेटी (एसएमसी) के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए। इन दिशा-निर्देशों का उद्देश्य देशभर के विद्यालयों में सामुदायिक भागीदारी को मजबूत करना और स्कूल प्रबंधन को अधिक प्रभावी व जवाबदेह बनाना है।
एसएमसी को विद्यालय प्रबंधन में अहम भूमिका दी गई है। इसके अंतर्गत विद्यालय की विकास योजना तैयार की जाएगी। शैक्षणिक गुणवत्ता की निगरानी भी यही समिति करेगी। समिति वित्तीय प्रबंधन और सामाजिक लेखा परीक्षण सुनिश्चित करेगी।
विभिन्न योजनाओं के समन्वय से संसाधनों का उपयोग करना और नियमित बैठकें व पारदर्शी निर्णय प्रक्रिया अपनाना एसएमसी के दायरे में लाया गया है। इन नए दिशा-निर्देशों के अनुसार राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को निर्देशित किया गया है कि कक्षा 12 तक सभी विद्यालयों में एसएमसी का गठन अनिवार्य रूप से किया जाए।
अब विद्यालय प्रबंधन विकास समिति की जगह एसएमसी लागू होगी। समिति की संरचना की बात करें तो इसमें विद्यालय प्रबंधन समिति में विभिन्न वर्गों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया गया है। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के मुताबिक, इसमें अभिभावक, स्थानीय प्राधिकरण के प्रतिनिधि, शिक्षक, शिक्षाविद् और विषय विशेषज्ञ, विद्यालय के पूर्व विद्यार्थी, वंचित समूहों के प्रतिनिधि, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता आदि शामिल होंगे।
विद्यालय के प्रधानाचार्य को समिति का सदस्य-सचिव बनाया गया है। सदस्य संख्या स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों की संख्या के आधार पर तय होगी। 100 तक विद्यार्थियों तक वाले स्कूल में 12 से 15 एसएमसी सदस्य होंगे। 100 से 500 छात्रों वाले स्कूलों में 15 से 20 एसएमसी सदस्य व 500 से अधिक विद्यार्थियों वाले स्कूलों में 20 से 25 एसएमसी सदस्य बनाए जाएंगे।
केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, इन सदस्यों के चयन के लिए मानदंड तय किए गए हैं। एसएमसी में शामिल कुल सदस्यों का 75 प्रतिशत अभिभावक होंगे। शेष 25 प्रतिशत सदस्य अन्य श्रेणियों से चुने जाएंगे। एक-तिहाई स्थानीय निकाय के निर्वाचित सदस्य व एक-तिहाई विद्यालय के शिक्षक होंगे।
एसएमसी के सदस्य-सचिव को कई प्रमुख जिम्मेदारियां निभानी होंगी। उन्हें शैक्षणिक वर्ष के एक महीने के भीतर समिति का गठन सुनिश्चित करना होगा। वार्षिक आम बैठक आयोजित कर अभिभावकों के बीच चुनाव कराना भी उनका दायित्व है। चुनाव के दौरान कम से कम 50 प्रतिशत अभिभावकों की उपस्थिति सुनिश्चित करना भी जरूरी होगा। इन दिशा-निर्देशों में क्षमता निर्माण, प्रशिक्षण, वित्तीय पारदर्शिता और सामाजिक जवाबदेही पर विशेष बल दिया गया है।
मंत्रालय का मानना है कि इससे विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार हो सकेगा। सरकार का मानना है कि इन नए दिशा-निर्देशों से स्कूल प्रबंधन में जनभागीदारी बढ़ेगी और स्थानीय स्तर पर निर्णय लेने की प्रक्रिया मजबूत होगी, जिससे शिक्षा व्यवस्था को और अधिक सशक्त बनाया जा सकेगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *