तृणमूल कांग्रेस की याचिका खारिज होने पर भाजपा ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का किया स्वागत

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नई दिल्ली{ गहरी खोज }: उच्चतम न्यायालय ने शनिवार को तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की याचिका को खारिज करते हुए चुनावी प्रक्रिया में किसी भी प्रकार के संवैधानिक हस्तक्षेप से इनकार कर दिया। अदालत के इस फैसले का भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने स्वागत किया है और टीएमसी पर तीखा राजनीतिक हमला बोला है। भाजपा ने कहा कि जिस प्रकार तृणमूल कांग्रेस ने अनर्गल और निराधार आरोपों को आधार बनाकर सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया, वह उसकी “बौखलाहट और छटपटाहट” को दर्शाता है।
भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि जैसे-जैसे पश्चिम बंगाल का चुनाव आगे बढ़ा, वैसे-वैसे टीएमसी का जनसमर्थन और मनोबल लगातार गिरता गया। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण और हिंसा-मुक्त मतदान संपन्न होने के बाद पार्टी में बेचैनी और अस्थिरता और बढ़ गई, जबकि एग्जिट पोल के रुझानों ने स्थिति को और स्पष्ट कर दिया। सुधांशु त्रिवेदी ने आरोप लगाया कि इसके बाद टीएमसी ने बिना आधार वाले मुद्दों को उठाकर उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया, जो उनकी राजनीतिक हताशा का संकेत है।
उन्होंने यह भी दावा किया कि पिछले 10 से 12 वर्षों में टीएमसी ने न्यायपालिका के विभिन्न स्तरों पर 80 से अधिक बार अपील की है, लेकिन हर बार उसे निराशा ही हाथ लगी। उनके अनुसार, उच्चतम न्यायालय ने आज संवैधानिक दृष्टिकोण से चुनावी प्रक्रिया में हस्तक्षेप की मांग वाली याचिका को स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया।
भाजपा सांसद ने यह भी कहा कि कपिल सिब्बल द्वारा दायर याचिका भी खारिज कर दी गई। साथ ही उन्होंने दावा किया कि आईपीएसी कार्यालय पर छापेमारी के दौरान मुख्यमंत्री का स्वयं मौके पर पहुंचना इस बात का संकेत है कि उन्हें अपने ही सहयोगियों पर पूर्ण भरोसा नहीं है।
सुधांशु त्रिवेदी ने आगे कहा कि कपिल सिब्बल, जो बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी से जुड़े मामलों में पक्षकारों का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं और राजनीतिक रूप से टीएमसी के प्रति झुकाव रखते हैं, उनकी याचिका का भी अदालत ने कोई संज्ञान नहीं लिया। उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय का यह निर्णय संवैधानिक दृष्टि से पूरी तरह उचित है, हालांकि राजनीतिक और नैतिक दृष्टि से यह टीएमसी के इरादों पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

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