केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने सीएम योगी को लिखा पत्र: एनसीआर में श्रमिकों की दुर्दशा पर चिंता व्यक्त

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लखनऊ{ गहरी खोज }: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के मंच ने एक विस्तृत पत्र लिखकर औद्योगिक क्षेत्रों, खासकर राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में काम कर रहे श्रमिकों की बदतर स्थिति का मुद्दा उठाया है। पत्र में श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी, लंबे काम के घंटे, सुरक्षा, यूनियन अधिकार और पुलिस कार्रवाई जैसे गंभीर मुद्दों पर ध्यान देने की मांग की गई है।
पत्र में कहा गया है कि पिछले 10 वर्षों से न्यूनतम मजदूरी में कोई संशोधन नहीं किया गया है, जबकि न्यूनतम मजदूरी अधिनियम में इसके लिए स्पष्ट प्रावधान हैं। महंगाई के कारण जरूरी वस्तुओं, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, जिससे श्रमिकों का जीवन और कठिन हो गया है।
ट्रेड यूनियनों ने आरोप लगाया कि कई औद्योगिक इकाइयों में कार्यस्थल पर सुरक्षा के न्यूनतम उपाय भी नहीं किए जा रहे हैं। श्रमिकों को बिना ओवरटाइम भुगतान के 12-13 घंटे काम करने को मजबूर किया जाता है। महिला श्रमिकों सहित श्रमिकों के साथ दुर्व्यवहार की शिकायतें आम हैं। कार्यस्थलों पर बुनियादी सुविधाएं जैसे शौचालय, पीने का पानी और विश्राम कक्ष तक उपलब्ध नहीं हैं। छुट्टियों के प्रावधानों की भी अनदेखी हो रही है।
पत्र में सबसे गंभीर मुद्दा यह उठाया गया है कि श्रमिकों को यूनियन बनाने की अनुमति नहीं दी जा रही है। यदि कोई श्रमिक यूनियन बनाने का प्रयास करता है तो उसे नौकरी से निकाल दिए जाने का खतरा रहता है। सामूहिक सौदेबाजी की पूरी तरह अनुपस्थिति से श्रमिकों में हताशा और निराशा बढ़ रही है।
ट्रेड यूनियनों ने आरोप लगाया कि जब श्रमिकों ने अपनी शिकायतें दर्ज कराईं तो प्रशासन ने उनके नेताओं को नजरबंद कर दिया। प्रदर्शन कर रहे श्रमिकों पर पुलिस द्वारा अत्याचार, गिरफ्तारियां और कड़ी धाराओं में मुकदमे दर्ज किए गए। महिला श्रमिकों का अपमान भी किया गया। कई परिवार अपने गिरफ्तार सदस्यों का पता लगाने के लिए दर-दर भटक रहे हैं और जमानत याचिकाएं भी खारिज हो रही हैं।
केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से आग्रह किया है कि वे श्रमिकों के प्रति नरम रुख अपनाएं, गिरफ्तार श्रमिकों को रिहा करवाएं और उनके परिवारों को राहत दें। उन्होंने कहा कि औद्योगिक अशांति का कारण श्रमिक नहीं, बल्कि नियोक्ताओं द्वारा कानूनों का पालन न करना है।
यूनियनों ने मांग की है कि तत्काल प्रभाव से न्यूनतम मजदूरी समिति या बोर्ड का गठन किया जाए, जिसमें वैज्ञानिक आधार पर मजदूरी तय की जा सके। साथ ही केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के प्रतिनिधियों और उत्तर प्रदेश के नेताओं के साथ बैठक बुलाकर श्रमिकों के मुद्दों पर चर्चा की जाए। ट्रेड यूनियनों ने चेतावनी दी है कि वैश्विक ऊर्जा संकट की स्थिति में यदि श्रमिकों की समस्याओं को नजरअंदाज किया गया तो उनकी बेचैनी और बढ़ेगी, जिससे औद्योगिक शांति प्रभावित हो सकती है।

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