भारत-दक्षिण कोरिया 2030 तक व्यापार को 50 अरब डॉलर तक ले जायेंगे

0
T20260420207483

नई दिल्ली{ गहरी खोज }: दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच व्यापक रणनीतिक और आर्थिक सहयोग को नई दिशा मिली है। भारत और दक्षिण कोरिया आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को अधिक प्रगाढ़ करते हुए आपसी व्यापार को 2030 तक 50 अरब डॉलर तक ले जाने को लेकर समहत हुए हैं।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल के अनुसार प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ली जे म्युंग ने नई दिल्ली में सार्थक और व्यापक बातचीत की। बातचीत के बाद दोनों नेता कई समझौतों और व्यवस्था के आदान-प्रदान के साक्षी बने।
वार्ता में दोनों नेताओं ने भारत-दक्षिण कोरिया विशेष रणनीतिक साझेदारी में हुई कुल प्रगति की समीक्षा की और व्यापार, वित्तीय सेवाओं, जहाज़ निर्माण, एआई, ऊर्जा, सेमीकंडक्टर, महत्वपूर्ण और उभरती तकनीकों, रक्षा और सुरक्षा, साथ ही लोगों के बीच और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के क्षेत्रों में सहयोग को और बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की। दोनों नेताओं ने आपसी हित के क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा की।
विदेश मंत्रालय के अनुसार ‘भारत-दक्षिण कोरिया स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप’ के तहत संयुक्त दृष्टि पत्र, शिपबिल्डिंग, समुद्री लॉजिस्टिक्स, ऊर्जा सुरक्षा और सतत विकास पर अहम समझौते हुए। साथ ही, व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (सीईपीए) को उन्नत करने के लिए वार्ता फिर शुरू करने की घोषणा की गई।
दोनों देशों ने पोर्ट्स, स्टील सप्लाई चेन, एमएसएमई, विज्ञान-प्रौद्योगिकी और डिजिटल ब्रिज जैसे क्षेत्रों में कई समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। वित्तीय सहयोग के तहत एनपीसीआई और कोरियाई संस्थान के बीच भुगतान प्रणाली को लेकर समझौता हुआ। इसके अलावा जलवायु परिवर्तन, पेरिस समझौते के तहत सहयोग और पर्यावरण संरक्षण को भी प्राथमिकता दी गई।
सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम (2026–2030), खेल और रचनात्मक उद्योगों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी। दोनों देशों ने आर्थिक सुरक्षा संवाद शुरू करने, इंडो-पैसिफिक पहल में कोरिया की भागीदारी और अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन में शामिल होने जैसे कदमों की घोषणा की। वर्ष 2028-29 को भारत-कोरिया मैत्री वर्ष के रूप में मनाने का निर्णय भी लिया गया।
विदेश मंत्रालय में सचिव (पूर्वी क्षेत्र) पी. कुमारन ने दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ली जे म्युंग की भारत यात्रा के संबंध में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ली ने हैदराबाद हाउस में सीमित और प्रतिनिधिमंडल स्तर के प्रारूपों में व्यापक और सार्थक चर्चा की।
कुमारन ने एक प्रश्न के उत्तर में बताया कि खाड़ी संकट के मुद्दे पर समस्या के समाधान को लेकर कोई विशेष चर्चा नहीं हुई। चर्चा खाड़ी संकट के प्रभावों को समझने और खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा सुरक्षा, रसायन बाज़ार, ईंधन बाज़ार और उर्वरक बाज़ार में होने वाली बाधाओं के संदर्भ में प्रभावों से कैसे निपटा जाए—इस पर केंद्रित थी।
उन्होंने कहा, “भारत प्राचीन और समकालीन, दोनों तरह की कहानियों का खज़ाना है, जिन पर गेम्स बनाए जा सकते हैं। इनमें कोरियाई टेक्नोलॉजी और स्पेशल इफ़ेक्ट्स की क्षमताओं का लाभ उठाया जा सकता है। प्रधानमंत्री ने दक्षिण कोरिया को ‘वेव्स’ इवेंट के अगले संस्करण में भाग लेने के लिए भी आमंत्रित किया।” एक विशेष पहल के तौर पर राष्ट्रपति ली ने ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के तहत एक पौधा भी लगाया। वार्ता के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और राष्ट्रपति जे-म्यूंग ली ने ‘भारत-कोरिया व्यापारिक नेताओं के संवाद’ में व्यापार जगत के नेताओं के साथ बातचीत की। प्रधानमंत्री मोदी ने कोरियाई कंपनियों को ‘मेक इन इंडिया, मेक फॉर वर्ड’ के लिए निमंत्रण दिया। ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’ और दक्षिण कोरिया की नवाचार की भावना पर आधारित, विश्वास और बदलाव में निहित एक मज़बूत और भविष्य-उन्मुख आर्थिक साझेदारी को आकार दिया जा रहा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *