छत्तीसगढ़ पावर प्लांट हादसे में अब तक 16 मजदूरों की मौत, जांच के आदेश

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सक्ती{ गहरी खोज }: छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में वेदांता पावर प्लांट हादसे में अब तक 16 लोगों की मौत हो चुकी हैं। मंगलवार दोपहर को हुए इस हादसे में चार मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई थी। पांच घायलों ने रायगढ़ मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान दम तोड़ा, जबकि पांच की मौत जिला अस्पताल रायगढ़ में हुई। इसके अलावा दो मजदूरों की मौत कालड़ा अस्पताल रायपुर में इलाज के दौरान हो गई।
हादसे में घायल 18 लोगों का इलाज अभी भी अलग-अलग अस्पतालों में चल रहा है। इनमें कई की हालत गंभीर बताई जा रही है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक मृतकों में कई लोग प्लांट के आसपास के गांवों जैसे सिंघीतराई, सक्ती और रायगढ़ जिले के निवासी थे। प्लांट में पेंटिंग और तकनीकी कार्य के लिए आए कई मजदूर पश्चिम बंगाल के रहने वाले थे। कुछ बिहार और झारखंड राज्यों से भी थे, जो तकनीकी कामों में लगे थे। मृतकों में अब तक ठंडाराम, पप्पू कुमार, अमृत लाल पटेल (50) और उत्तर प्रदेश निवासी बृजेश कुमार की पहचान हो पाई है, जबकि अन्य की पहचान की प्रक्रिया जारी है। अधिकारियों का कहना है कि गंभीर रूप से जलने के कारण शिनाख्त में कठिनाई हो रही है। शवों के बुरी तरह झुलसने के कारण उनकी पहचान के लिए डीएनए टेस्ट और आधार कार्ड का सहारा लिया जा रहा है।
हादसे के बाद प्लांट के बाहर मजदूरों के परिजनों ने जमकर हंगामा किया। उन्होंने प्लांट प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हादसे की जांच की मांग करते हुए सख्त कार्रवाई मांग की। परिजनों का कहना है कि कुछ मजदूर अब भी लापता हैं और प्रबंधन की ओर से स्पष्ट जानकारी नहीं दी जा रही है।
जांच के आदेशघटना की गंभीरता को देखते हुए सक्ती कलेक्टर अमृत विकास तोपनो ने मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दे दिए हैं। प्रशासन द्वारा पूरे मामले की विस्तृत जांच कर जिम्मेदारों पर कार्रवाई की बात कही जा रही है।
सहायता राशि की घोषणावेदांता प्रबंधन ने मृतकों के परिजनों को 35-35 लाख रुपये की सहायता राशि और एक सदस्य को नौकरी देने की घोषणा की है। साथ ही घायलों को 15-15 लाख रुपये देने की बात कही है। वेदांता ग्रुप ने कहा कि दुख की इस घड़ी में हमारी संवेदनाएं और प्रार्थनाएं उन सभी के साथ हैं जो इससे प्रभावित हुए हैं। हम इन परिवारों को अपना अटूट समर्थन देना जारी रखेंगे।
इससे पहले प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से भी राहत राशि की घोषणा की गई थी। प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (पीएमएनआरएफ) के तहत मृतकों के परिजनों को 2 लाख रुपये और घायलों को 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने घटना पर दुख जताते हुए मृतकों के परिजनों को पांच लाख रुपये और घायलों को 50 हजार रुपये मुआवजा देने की घोषणा की है।मुख्यमंत्री साय ने बिलासपुर संभाग के कमिश्नर को इस घटना की जांच करने का आदेश दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार पूरे मामले पर सतत निगरानी रखे हुए है और प्रभावित परिवारों के साथ पूरी संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता के साथ खड़ी है। वहीं स्थानीय लोगों और श्रमिक संगठनों ने प्लांट में सुरक्षा मानकों की जांच और सख्त निगरानी की मांग की है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। फिलहाल दुर्घटना वाली यूनिट (यूनिट-1) को पूरी तरह बंद कर दिया गया है और औद्योगिक सुरक्षा विभाग के अधिकारी मौके पर साक्ष्य जुटा रहे हैं।

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