गोबरधन योजना: बायोगैस संयंत्रों ने बदली यूपी के गांवों की तस्वीर, स्वच्छता के साथ आय और रोजगार में बढ़ोतरी

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लखनऊ{ गहरी खोज } : उत्तर प्रदेश में गोबरधन योजना के जरिए ‘वेस्ट टू वेल्थ’ मॉडल ने गांवों की तस्वीर बदलनी शुरू कर दी है। गोबर और जैविक कचरे से ऊर्जा व खाद तैयार कर पंचायतों ने 28 लाख रुपए से अधिक की आय अर्जित की है। वहीं बायोगैस से संचालित ग्रामीण उद्योग स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार दे रहे हैं।
प्रदेश के 74 जनपदों में स्थापित 116 बायोगैस संयंत्र गांवों में स्वच्छता, ऊर्जा उत्पादन और आय सृजन का मजबूत आधार बनते जा रहे हैं। इन संयंत्रों में गोबर, रसोई कचरा और कृषि अवशेषों का वैज्ञानिक प्रबंधन कर बायोगैस और जैविक खाद तैयार की जा रही है, जिससे न सिर्फ पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिल रहा है, बल्कि पंचायतों की आर्थिक स्थिति भी सुदृढ़ हो रही है। फरवरी 2026 तक ग्राम पंचायतों ने जैविक खाद और अन्य उत्पादों की बिक्री से 28 लाख रुपए से अधिक की आय अर्जित की है।
स्वयं की आय (ऑन सोर्स रेवेन्यू) के मामले में ललितपुर जिला सबसे आगे है, जहां पंचायतों ने 3.37 लाख रुपए से अधिक की कमाई दर्ज की। इसके बाद श्रावस्ती (2.87 लाख रुपए) और रामपुर (1.23 लाख रुपए) का स्थान रहा। बायोगैस ऊर्जा का उपयोग गांवों में स्थानीय जरूरतों को पूरा करने में भी हो रहा है। रामपुर में इस ऊर्जा से तेल पिराई मशीन संचालित की जा रही है, जबकि आगरा, ललितपुर, श्रावस्ती, बुलंदशहर, बांदा, सोनभद्र और हरदोई जैसे जिलों में आटा चक्कियां बायोगैस से चल रही हैं। इससे ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर सुविधाएं मिल रही हैं और रोजगार के अवसर भी सृजित हो रहे हैं।
पंचायती राज विभाग के अनुसार कई संयंत्र गौशालाओं में स्थापित किए गए हैं, जहां गोबर और अन्य जैविक कचरे से स्वच्छ ईंधन और जैविक खाद तैयार की जा रही है। यह पहल कचरा प्रबंधन के साथ वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत विकसित करने में अहम भूमिका निभा रही है।
गोबरधन योजना के तहत तैयार जैविक खाद का उपयोग किसान जैविक खेती में कर रहे हैं, जिससे खेती की लागत घट रही है और भूमि की उर्वरता में सुधार हो रहा है। साथ ही स्वच्छ ऊर्जा के इस्तेमाल से ग्रामीण क्षेत्रों में प्रदूषण भी कम हो रहा है।
पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने कहा कि राज्य सरकार गांवों को स्वच्छ और आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि गोबरधन योजना स्वच्छ ऊर्जा, जैविक खेती और पंचायतों की आय—तीनों को मजबूती दे रही है, जिससे स्थानीय विकास को गति मिल रही है। वहीं, पंचायती राज विभाग के निदेशक अमित कुमार सिंह ने बताया कि यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों में संसाधनों के बेहतर उपयोग का प्रभावी मॉडल बनकर उभर रही है और पंचायतों की आय में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है।

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