सोनिया गांधी के खिलाफ मतदाता सूची में कथित जालसाजी मामले में अगली सुनवाई 18 अप्रैल को होगी

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नई दिल्ली{ गहरी खोज }: राउज एवेन्यू कोर्ट में सोनिया गांधी के खिलाफ गैरकानूनी तरीके से मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के मामले में सुनवाई अब 18 अप्रैल को होगी। सोनिया गांधी के खिलाफ बिना भारतीय नागरिकता प्राप्त किए वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने की कथित जालसाजी की शिकायत की गई है। याचिकाकर्ता ने इसकी जांच कराने और मुकदमा दर्ज करने की मांग की है।
वकील विकास त्रिपाठी की ओर से दाखिल रिवीजन पिटीशन पर आज अदालत में सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता के वकील ने अपनी बहस पूरी कर दी, लेकिन सोनिया गांधी की तरफ से दलीलें पूरी नहीं हो सकीं। कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए 18 अप्रैल की तारीख तय की है। सुनवाई के दौरान राउज़ एवेन्यू कोर्ट ने याचिकाकर्ता के वकील से कई सवाल पूछे।
कोर्ट ने कहा कि यह मामला लगभग आधी सदी पुराना है और आप एफआईआर दर्ज करने की मांग कर रहे हैं। जांच किस स्तर पर और कैसे होगी? कोर्ट ने यह भी पूछा कि आप मामले का दायरा बढ़ा रहे हैं। अदालत ने कहा कि आज आप जो जानकारी दे रहे हैं, वह सिर्फ नाम जोड़ने और हटाने की परिस्थितियों तक सीमित है। याचिकाकर्ता के वकील ने जवाब देते हुए कहा कि यह एक विदेशी नागरिक द्वारा की गई गलत घोषणा का मामला है।
उन्होंने अदालत को बताया कि वे यह साबित करने की कोशिश कर रहे हैं कि सोनिया गांधी का नाम 1980 की मतदाता सूची में केवल जाली दस्तावेजों या धोखाधड़ी के जरिए ही शामिल किया जा सकता था। वकील ने कहा कि उन्होंने मतदाता सूची की सत्यापित प्रतियां मांगी थीं और उन्हें उपलब्ध भी कराई गई हैं। उन्होंने दावा किया कि प्रथम दृष्टया गलत घोषणा साबित होती है, इसलिए जाली दस्तावेजों और जालसाजी की जांच होनी चाहिए। याचिका में आरोप लगाया गया है कि सोनिया गांधी ने 30 अप्रैल 1983 को भारतीय नागरिकता प्राप्त की थी, लेकिन उनका नाम 1980 की नई दिल्ली की मतदाता सूची में पहले से शामिल था।
याचिका के अनुसार 1982 में उनका नाम सूची से हटा दिया गया था। जब 1983 में नागरिकता मिली, तब यह सवाल उठाया गया कि 1980 में नाम शामिल कराने के लिए कौन से दस्तावेज पेश किए गए थे और क्या फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल हुआ था। पिछली सुनवाई में सोनिया गांधी की तरफ से जवाब दाखिल कर याचिका को तथ्यहीन, राजनीतिक रूप से प्रेरित और कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग बताया गया था। सितंबर 2025 में मजिस्ट्रेट कोर्ट ने इस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसके बाद विकास त्रिपाठी ने रिवीजन पिटीशन दायर की।

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