सिल्ट और ड्रेजिंग पर सरकार गंभीर, मछुआरों को दी जाएगी राहत: मुख्यमंत्री सुक्खू

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शिमला{ गहरी खोज }: हिमाचल प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र में सोमवार को प्रश्नकाल के दौरान विधायकों द्वारा देहरा क्षेत्र में मछुआरों की आजीविका, नदियों में बढ़ती सिल्ट और ड्रेजिंग के मुद्दे उठाने के बाद मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए ठोस कदम उठा रही है। सबसे पहले देहरा की विधायक कमलेश ठाकुर ने देहरा में सिल्ट के कारण मछुआरों को रही दिक्कतों का मामला उठाया।
इस पर मुख्यमंत्री सुक्खू ने बताया कि देहरा का अधिकांश क्षेत्र भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) के अधीन आता है, इसलिए इस विषय पर उससे समन्वय जरूरी है, वहीं राज्य ने ड्रेनेज पॉलिसी के तहत उन स्थानों की पहचान शुरू की है जहां नदियों और खड्डों में अधिक सिल्ट जमा हो रही है लेकिन ड्रेजिंग नहीं हो पा रही।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मछुआरों के हित में बजट में योजना लाई गई है, जिसके तहत वर्ष में दो महीने मछली पकड़ने पर रोक के दौरान भी उन्हें आर्थिक सहायता दी जाएगी और सिल्ट से मछलियों को हो रहे नुकसान को ध्यान में रखते हुए प्रावधान किए गए हैं, साथ ही देहरा क्षेत्र की समस्याओं का समाधान भविष्य में किया जाएगा।
फतेहपुर के विधायक भवानी सिंह पठानिया के सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि ड्रेजिंग के लिए वन और माइनिंग विभाग के साथ संयुक्त रूप से वैज्ञानिक मैपिंग करवाई जाएगी जिसमें संबंधित जिला उपायुक्त व स्थानीय जनप्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाएगा, जबकि झंडुता के विधायक जीत सिंह कटवाल के प्रश्न पर कोऑपरेटिव फेडरेशन की जांच के निर्देश देने की बात कही। बल्ह के विधायक इंद्र सिंह गांधी ने सिल्ट से फसलों और घरों को हो रहे नुकसान का मुद्दा उठाते हुए सुकेती खड्ड के चौनलाइजेशन की मांग की, जिस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि सिल्ट की समस्या पूरे प्रदेश में है और कुल्लू में पायलट प्रोजेक्ट चल रहा है, जिसकी सफलता के बाद इसे अन्य क्षेत्रों में लागू किया जाएगा। मनाली के विधायक भुवनेश्वर गौड़ की अनुपस्थिति में धर्मपुर के विधायक चंद्रशेखर के सवाल पर मुख्यमंत्री ने बताया कि ब्यास नदी सहित विभिन्न खड्डों में ड्रेजिंग के लिए 42 साइटें चिन्हित की गई हैं और मनाली को प्राथमिकता दी गई है, हालांकि इसके लिए वन स्वीकृति आवश्यक है।
मुख्यमंत्री ने नूरपुर के विधायक रणबीर सिंह निक्का के अनुपूरक सवाल के जवाब में कहा कि कृषि कार्याें के लिए अधिकृत ट्रैक्टर चालकों के लिए नई नीति लाने पर विचार किया जा रहा है ताकि उन्हें राहत मिल सके। इसमें ट्रैक्टर चालकों को खनन की अनुमति देने पर विचार किया जाएगा। केवल सिंह पठानिया ने ट्रैक्टर चालकों पुलिस द्वारा कथित उत्पीड़न का मुद्दा उठाया। वहीं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने ब्यास नदी में बार-बार होने वाले नुकसान और 2023 की आपदा के दौरान मलबा हटाने में लगी मशीनरी को लेकर सवाल उठाए, जिसके जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार चैैेनलाइजेशन के बजाय ड्रेजिंग पर ध्यान दे रही है और यदि किसी स्थान पर अनियमितता हुई है तो उसकी जानकारी देने पर जांच करवाई जाएगी।

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