कैथल पुलिस ने 84 लाख की संपत्ति फ्रीज कर नशा तस्करों को दिया झटका

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कैथल{ गहरी खोज }: नशा तस्करी के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति अपनाते हुए कैथल पुलिस ने पांच आदतन तस्करों की करीब 84 लाख रुपये मूल्य की संपत्ति को फ्रीज करवा दिया है। एसपी मनप्रीत सिंह सूदन ने बताया कि यह कार्रवाई नशा कारोबारियों के खिलाफ एक कड़ा संदेश है कि अब केवल गिरफ्तारी ही नहीं, बल्कि उनकी अवैध कमाई पर भी सीधा प्रहार होगा। उन्हाेंने बताया कि पुलिस द्वारा नशा बेचकर अर्जित की गई संपत्ति का पूरा केस तैयार कर वित्त मंत्रालय (राजस्व विभाग) के तहत आने वाले सक्षम प्राधिकारी एवं प्रशासक को भेजा गया था। इसी आधार पर संबंधित विभाग ने आरोपियों की संपत्तियों को फ्रीज करने के आदेश जारी किए हैं। अब इन संपत्तियों की खरीद-फरोख्त पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा और इसके निर्देश सभी संबंधित विभागों को भी भेज दिए गए हैं।
एसपी मनप्रीत सिंह सूदन ने बताया कि पहले मामले में कलायत के सजुमा रोड निवासी राजेश और उसके भाई विकास को शामिल किया गया है। राजेश के खिलाफ नशा तस्करी के तीन मामले दर्ज हैं, जिनमें अलग-अलग वर्षों में गांजा बरामद किया गया। वहीं विकास के खिलाफ छह मामले दर्ज हैं, जिनमें गांजा और हेरोइन की बरामदगी शामिल है। दोनों को आदतन तस्कर मानते हुए पुलिस ने उनकी और उनके परिवार के सदस्यों के नाम पर दर्ज संपत्तियों को फ्रीज कराया है। इस कार्रवाई में मकान, प्लॉट, दो बाइक और बैंक खाते शामिल हैं, जिनकी कुल कीमत करीब 26 लाख रुपये है।
दूसरे मामले में गांव खरकां निवासी बीरो देवी, उसके पति मालक राम और पुत्र रवि को शामिल किया गया है। तीनों के खिलाफ थाना गुहला में नशा तस्करी के कई मामले दर्ज हैं और कुछ मामलों में सजा भी हो चुकी है।
इनके खिलाफ कार्रवाई करते हुए एक मकान, तीन प्लॉट, एक बाइक, एक इनोवा गाड़ी, 49.52 ग्राम सोने के आभूषण, 245 ग्राम चांदी के आभूषण और बैंक खातों को फ्रीज किया गया है। इनकी कुल कीमत करीब 58 लाख 40 हजार रुपये आंकी गई है।
एसपी मनप्रीत सिंह सूदन ने कहा कि नशा तस्करों के खिलाफ अभियान और तेज किया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि जो लोग युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ कर रहे हैं, उन्हें किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। अब नशे के धंधे से कमाई गई संपत्ति सुरक्षित नहीं है—या तो अपराध छोड़ दें या अपनी पूरी संपत्ति गंवाने के लिए तैयार रहें।
नशा तस्करी से अर्जित संपत्ति का पूरा विवरण तैयार कर पुलिस विभाग द्वारा इसे वित्त मंत्रालय (राजस्व विभाग) के सक्षम प्राधिकारी को भेजा जाता है। संबंधित व्यक्ति को नोटिस देकर संपत्ति के वैध स्रोत के प्रमाण मांगे जाते हैं। यदि संतोषजनक जवाब नहीं मिलता, तो विभाग द्वारा उस संपत्ति को फ्रीज या सीज करने के आदेश जारी कर दिए जाते हैं।

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