गौ रक्षा के लिए चतुरंगिणी सेना का प्रदेश भर में होगा गठन : महामंडलेश्वर

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औरैया{ गहरी खोज }: आदिशक्ति गौ रक्षा अखाड़ा की ओर से सनातन धर्म एवं राष्ट्रहित के अंतर्गत “गौ रक्षा एवं चतुरंगिणी सेना के गठन” विषय पर पंचमुखी हनुमान मंदिर के पास श्री पीताम्बरेश्वर सरकार धाम में सोमवार को एक प्रेस वार्ता आयोजित हुआ। जिसमें महामंडलेश्वर स्वामी शिवम महाराज (पीठाधीश्वर, श्री पीताम्बरेश्वर सरकार धाम एवं प्रमुख, आदिशक्ति गौ रक्षा अखाड़ा) ने संगठन के विस्तार, उद्देश्यों और आगामी योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि चतुरंगिणी सेना का गठन जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज की प्रेरणा से किया गया है। अब इसका विस्तार प्रदेश के प्रत्येक जनपद में किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह संगठन सनातन धर्म की रक्षा, गौ संरक्षण और सांस्कृतिक जागरण के लिए कार्य करेगा, जिसमें गौ रक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।
महामंडलेश्वर शिवम महाराज ने बताया कि प्रत्येक क्षेत्र में “पत्तीपाल” नियुक्त किए जाएंगे, जिनके साथ 10 सदस्यों की टीम कार्य करेगी। जल्द ही इसके लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी। उन्होंने लगभग 2,18,700 सदस्यों की विशाल अक्षौहिणी सेना तैयार करने का लक्ष्य रखा है।
उन्होंने कहा कि गौ माता को राष्ट्र माता का दर्जा मिलना चाहिए। “हम सभी गौ माता का दूध पीकर बड़े हुए हैं, लेकिन जब उनके संरक्षण की बात आती है तो यह विषय केवल राजनीति तक सीमित रह जाता है। उन्होंने यह भी प्रश्न उठाया कि इतने वर्षों बाद भी इस दिशा में ठोस निर्णय क्यों नहीं लिया गया।
प्रयागराज में ब्राह्मण बटुकों के साथ हुई घटना पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया। कहा कि प्रशासन की ओर से उचित कार्रवाई न होना और धर्माचार्यों से उनके पद का प्रमाण मांगना निंदनीय है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आज धर्मगुरुओं का सम्मान कम हो रहा है, जबकि प्राचीन समय में राजा भी उनके मार्गदर्शन का पालन करते थे।
प्रेस वार्ता में शंकराचार्य पद की महत्ता बताते हुए कहा गया कि यह सनातन धर्म का सर्वोच्च आध्यात्मिक पद है, जिसकी परम्परा आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित चार प्रमुख पीठों से चली आ रही है। उनकी दिनचर्या में ब्रह्म मुहूर्त में जागरण, ध्यान, वेद-उपनिषदों का अध्ययन, पूजा-अनुष्ठान और समाज को मार्गदर्शन शामिल होता है।
महामंडलेश्वर शिवम महाराज ने समाज और सरकार से अपील की कि गौ हत्या और गौ उपेक्षा पर कठोर कार्रवाई की जाए तथा संतों और धर्माचार्यों का सम्मान सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने सभी सनातन धर्मावलम्बियों से आह्वान किया कि वे चतुरंगिणी सेना से जुड़कर धर्म, संस्कृति और गौ रक्षा के इस अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाएं।

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