आरोप लगे हैं तो जांच होनी ही चाहिए

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सुनील दास
संपादकीय { गहरी खोज }:
भ्रष्टाचार के मामले में साय सरकार की नीति जीरो टालरेंस की है। इस बात से कोई इंकार नहीं कर सकता कि साय सरकार ने पहले दिन से यह साफ कर दिया था कि पिछली सरकार के समय जहां जहां जैसा जैसा भ्रष्टाचार हुआ वहां पर अब कोई भ्रष्टाचार नहीं होगा। चाहे शराब नीति का मामला हो, पीएससी में गड़ब़ड़ी का मामला हो।सरकारी दफ्तरों में होने वाले रोज के भ्रष्टाचार हो,भ्रष्टाचार की शिकायत मिलनेे पर कार्रवाई की बात हो तो माना जा सकता है कि साय सरकार भ्रष्टाचार रोकने के लिए पूरी गंभीरता से काम किया है, इससे जनता में संदेश गया है कि साय सरकार के रहते राज्य में भ्रष्टाचार पहले की तरह आसान तो नहीं है।ऐसे में जंबूरी आयोजन में ठेका देने के मामले में जो गड़बड़ी के आरोप लगाए गए हैं, उसकी जांच तो हाेनी चाहिए ताकि सच क्या है जनता के सामने आ सके।
पांच दिवसीय जंबूरी का आयोजन पूरा हो गया है।सीएम साय ने इस मौके पर कहा है कि स्काउट जीवन पध्दति है जो हमें चुनौतियों से जूझना सिखाती है।इस बात में दो मत नहीं है कि राज्य के बालोद जिले में आयोजित जंबूरी आयोजन की दृष्टि से सफल रहा है। बड़ा आयोजन हो तो छोटी मोटी शिकायतें तो रहती है, इन छोटी मोटी शिकायतों को छोड़ दिया जाए तो आयोजन की सराहना की जा सकती है। आयोजन के दौरान साथ साथ बिना टेंडर के हुए काम को लेकर जो कुछ कहा जाता रहा है, उसकी खूब चर्चा भी रही। कैंप एरिया में ढाई करोड के टायलेट लगाकर घोटाले के आरोप पर सांसद बृजमोहन अग्रवाल का कहना है कि मैंने जो मुद्दे उठाए थे,वह सब सही साबित हो रहे हैं।जो भी सक्षम अथारिटी है,उसे इस मामले में कार्रवाई करनी चाहिए।
नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने जंबूरी मामले में कहा है कि भाजपा के वरिष्ठ नेता द्वारा ही अपनी ही सरकार के मंत्री पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाना ही इस बात का प्रमाण है कि पार्टी का चाल-चरित्र भ्रष्टाचार से भरा हुआ है।यही भाजपा की अंदरूनी सचाई है। बिना टेंडर के किसी काे भी काम देता भ्रष्टाचार की श्रेणी में आता है।पूर्व संसदीय सचिव विकास उपाध्याय ने कहा है कि जंबूरी आयोजन स्थल का मुआयना करने पर ही सच का पता चलेगा कि जितना खर्च बताया जा रहा है कि वह वाकई में कि्या गया है या नहीं।जंबूरी के लिए जो भी निर्माण किया गया है वह अस्थायी है।कुछ दिन बाद हटा दिया जाएगा।उसके बात स्थल पर कोई प्रमाण नहीं मिलेगा कि कितने टायलेट बने थे, कितने तंबू लगाए गए थे।विभागीय मंत्री को टीम गठित कर जंबूरी स्थल पर जो जो काम किए गए हैं, उसका सत्यापन कराना चाहिए। भाजपा सांसद के भ्रष्टाचार के आरोप के बाद कांग्रेस को साय सरकार को घेरने का मौका मिल गया है।कांग्रेस महामंत्री सुबोध हरितवाल ने जंबूरी में हुए भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए सक्षम विशेष न्यायालय एसीबी व ईओडब्लू के समक्ष याचिका दायर की है।उन्होंने विश्वास जताया है कि जल्द ही दोषियों व भ्रष्टाचार करने वाले सभी जिम्मेदारी लोगों के खिलाफ कार्रवाई होगी।
जंबूरी में हुए खर्च को लेकर उठे आरोपों पर शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने कहा है कि आयोजन के बाद भारत स्काउट गाइड का पूरा खर्च सार्वजनिक किया जाएगा।वर्क आर्डर से भुगतान तक सब सामने आएगा।अभी तक कोई भुगतान नहीं किया गया है।उन्होंने यह भी कहा था कि बृजमोहन मेरे बड़े भाई हैं,वे नाराज है तो उनसे मुलाकात करूंगा।कांग्रेस के लोगों ने बिना विचारे आरोप लगाया है।बृजमोहन भैया कोई दूसरे नहीं है।शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने मामले को निपटाने का प्रयास तो किया हैं लेकिन सफल नहीं हुए। मामला पार्टी के भीतर ही निपटाया जा सकता था,इसे जितनी गंभीरता से लिया जाना था नहीं लिया गया और जिस तरह से स्काउट गाइड के प्रदेश अध्यक्ष पद से बृजमोहन को हटाया गया उससे उनका नाराज होना स्वाभाविक था और उनकी नाराजगी से ही मामला इतना बिगड़ गया है कि अब सरकार के सामने मामले की जांच के अलावा कोई चारा नहीं बचा है।जांच नहीं होती है तो सरकार की भ्रष्टाचार पर जीरो टालरेंस की नीति पर सवालिया निशान लगाने का मौका कांग्रेस को मिलेगा।

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