हिंदी भारत को समझने की कुंजीः मिजोकामी

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नई दिल्ली{ गहरी खोज }: पद्मश्री से अलंकृत जापान के भाषाविद् और ओसाका विश्वविद्यालय के प्रो. तोमियो मिज़ोकामी ने शनिवार को कहा कि हिंदी केवल एक भाषा नहीं है, बल्कि भारत की संस्कृति, समाज और सोच को जानने की कुंजी है। प्रो मिजोकामी ने यह बात आज भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद की ओर से नई दिल्ली में आयोजित ‘विश्व हिंदी दिवस’ कार्यक्रम में कही। इसमें थाईलैंड, यूक्रेन, श्रीलंका, अफ़ग़ानिस्तान, तंज़ानिया, उज़्बेकिस्तान, सीरिया जैसे देशों के छात्र शामिल हुए। प्रो. मिज़ोकामी ने कहा, “भारत को समझने के लिए हिंदी को समझना जरूरी है। हिंदी में वह शक्ति है कि एक दिन यह संयुक्त राष्ट्र की आधिकारिक भाषा बनें। जिस तरह हिंदी करोड़ों लोगों की आवाज़ है, उसी तरह आने वाले समय में हिंदी साहित्य को नोबेल पुरस्कार जैसी वैश्विक मान्यता भी मिलेगी।”
आईसीसीआर महानिदेशक के. नंदिनी सिंगला ने कहा कि प्रो मिज़ोकामी भारत और जापान के बीच सांस्कृतिक मित्रता के जीवंत प्रतीक हैं। हिंदी और भारतीय भाषाओं के लिए उनका समर्पण यह साबित करता है कि भाषा देशों के बीच रिश्तों की सबसे मजबूत नींव होती है। आईसीसीआर के उप महानिदेशक डॉ. राजेश रंजन ने कहा कि इस कार्यक्रम में विदेशी छात्रों की मौजूदगी यह दर्शाती है कि आज हिंदी वैश्विक संवाद की भाषा बन चुकी है। उल्लेखनीय है कि प्रो. मिज़ोकामी ने अपना पूरा जीवन हिंदी और छह अन्य भारतीय भाषाओं के अध्ययन, शिक्षण तथा प्रचार के लिए समर्पित किया है। भारत सरकार ने उन्हें वर्ष 2018 में पद्मश्री से नवाजा था। वह इस समय भारतीय सांस्कृति संबंध परिषद (आईसीसीआर) के विशेष आमंत्रण पर भारत यात्रा पर हैं और वे 14 जनवरी 2026 तक छात्रों और भाषा प्रेमियों से संवाद करेंगे।

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