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  • इरविन खन्ना
    संपादकीय { गहरी खोज }:
    देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर में दूषित पानी पीने के कारण 14 लोगों की मौत हो चुकी है और 200 लोग अस्पतालों में भर्ती हैं। जबकि 1400 लोगों के प्रभावित होने का समाचार है। अधिकारियों के मुताबिक, पहली नजर में रिसाव के कारण पेयजल की पाइपलाइन में ड्रेनेज का गंदा पानी मिलने के कारण भागीरथपुरा में उल्टी-दस्त का प्रकोप फैला। भागीरथपुरा, राज्य के नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के विधानसभा क्षेत्र इंदौर-1 में आता है। विजयवर्गीय ने संवाददाताओं को बताया कि उल्टी-दस्त के प्रकोप से भागीरथपुरा में 1400 से 1500 लोग प्रभावित हुए जिनमें से लगभग 200 मरीज अस्पतालों में भर्ती हैं। इन मरीजों की हालत खतरे से बाहर है और स्वस्थ होने पर लोगों को अस्पताल से लगातार छुट्टी दी जा रही है। विजयवर्गीय ने उल्टी-दस्त के प्रकोप से मरे लोगों के आंकड़े को लेकर जारी विरोधाभास पर कहा कि मुझे प्रशासन के अधिकारियों ने इस प्रकोप से चार लोगों की मौत की जानकारी दी है, पर यहां (भागीरथपुरा में) आठ-नौ लोगों की मौत की सूचना है। हम इस सूचना की तसदीक कर लेंगे और इसके सही पाए जाने पर संबंधित मृतकों के परिवारों को मुख्यमंत्री मोहन यादव की घोषणा के अनुसार सहायता राशि प्रदान की जाएगी। इस बीच, राज्य के अतिरिक्त मुख्य सचिव संजय दुबे ने स्थानीय अफसरों के साथ भागीरथपुरा क्षेत्र का दौरा करके हालात का जायजा लिया। अधिकारियों ने बताया कि पेयजल की आपूर्ति की पाइपलाइन के रिसाव को दुरुस्त करने के बाद भागीरथपुरा में गुरुवार को जलप्रदाय किया गया और घरों से पानी के नमूने लेकर जांच के लिए भेजे गए। वहीं, हाई कोर्ट ने इंदौर के इस मामले को संज्ञान में लिया है और दो दिन में मामले की रपट कोर्ट में पेश करने को कहा है।
    नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय को जब दूषित पेयजल को लेकर पत्रकार ने प्रश्न पूछा तो वह आपा खो बैठे और बोले फोकट में प्रश्न मत करो। अब उन्होंने अपनी इस बात पर खेद प्रकट किया है, लेकिन सत्ता कैसे व्यक्ति को संवेदनहीन बना देती
    है यह बात विजयवर्गीय के व्यवहार से समझी जा सकती है। इंदौर जो देश का सबसे स्वच्छ शहर माना जाता है, उसके बुनियादी ढांचे की कमजोरी के कारण 14 लोगों को जान गंवानी पड़ी और सैकड़ों अस्पतालों में हैं। यह घटना बताती है कि बढ़ती जनसंख्या के कारण बुनियादी ढांचे पर दबाव बढ़ रहा है। लेकिन सरकारें इस पर ध्यान नहीं दे रही, जबकि शहरों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करना समय की मांग है। इंदौर जैसे शहर की हालत ऐसी है तो दूसरे शहरों की क्या स्थिति होगी, उसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। शहरों पर बढ़ते दबाव को देखते हुए प्रदेश की सरकारों को बिजली, पानी और सीवरेज जैसी बुनियादी सुविधाओं को मजबूत किए बिना विकास की सारी योजनाएं बेकार हैं, यह बात समझनी होगी। बाहरी दिखावे से आंतरिक मजबूती अधिक महत्त्वपूर्ण है।

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