वैज्ञानिकों ने एक नई तकनीक का इस्तेमाल करके घूमते हुए ब्लैक होल की अब तक की सबसे साफ़ तस्वीर खींची
विज्ञान { गहरी खोज }:वैज्ञानिकों ने एक नई तकनीक का इस्तेमाल करके घूमते हुए ब्लैक होल की अब तक की सबसे साफ़ तस्वीर खींची है। यह उपलब्धि अंतरिक्ष में लगाए गए XRISM टेलीस्कोप की वजह से संभव हुई, जिसने NASA और यूरोपियन स्पेस एजेंसी के दूसरे उपकरणों के साथ मिलकर काम किया। इस रिसर्च में ब्लैक होल के पास आयरन के कणों से निकलने वाली एक्स-रे का अध्ययन किया गया, जिससे अल्बर्ट आइंस्टीन के पुराने सिद्धांतों की पुष्टि हुई। जिस ब्लैक होल का अध्ययन किया गया है, वह पृथ्वी से 120 मिलियन प्रकाश-वर्ष दूर एक गैलेक्सी के केंद्र में स्थित है और हमारे सूर्य से लगभग 2 मिलियन गुना ज़्यादा विशाल है।एक लंबे समय से चली आ रही वैज्ञानिक बहस कई सालों से वैज्ञानिकों के बीच एक बड़ी बहस चल रही थी। वे यह तय नहीं कर पा रहे थे कि ब्लैक होल के पास से निकलने वाली रोशनी उसमें गिरने वाले पदार्थ से आ रही है या उसके चारों ओर मौजूद तेज़ हवाओं से। XRISM ने इतनी साफ़ तस्वीर खींची कि वैज्ञानिक ब्लैक होल के बहुत करीब आयरन उत्सर्जन के एक खास संकेत का पता लगा पाए। ये उत्सर्जन ज़्यादा दूर की गैस से होने वाले उत्सर्जन से 50 गुना ज़्यादा मज़बूत थे। वैज्ञानिकों ने यह भी पता लगाया कि यह ब्लैक होल बहुत तेज़ी से घूम रहा है। हालांकि, यह कितनी तेज़ी से घूम रहा है, यह अभी भी तय करना मुश्किल है क्योंकि इसकी चमक लगातार बदल रही थी।टेलीस्कोप ने और क्या देखा? वैज्ञानिकों ने ब्लैक होल के पास हवाओं की पाँच अलग-अलग परतें देखीं, जिनमें से कुछ धूल की बनी थीं और कुछ गैस की। ये हवाएँ 20,000 किलोमीटर प्रति सेकंड की गति से यात्रा कर रही हैं – इतनी तेज़ कि पलक झपकते ही पूरी पृथ्वी का चक्कर लगा सकती हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि ये शक्तिशाली हवाएँ यह तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं कि कोई गैलेक्सी कैसे विकसित होती है और उसके अंदर नए तारे कैसे बनते हैं।
