ठंड ने देशभर में बरपाया कहर, सर्दी से हाइपोथर्मिया, निमोनिया का खतरा बढ़ा:स्वामी रामदेव
लाइफस्टाइल डेस्क { गहरी खोज }: आज नए साल का दूसरा दिन है और कुदरत का करिस्मा कश्मीर की वादियों में देखने को मिल रहा। कश्मीर में बर्फबारी हुई है। पहलगाम, सोनमर्ग में तापमान शून्य से नीचे है और हैरानी की बात ये है कि इतनी भीषण ठंड के बावजूद सैलानियों का जोश जरा भी ठंडा नहीं पड़ा है। और इस बर्फबारी का असर सिर्फ पहाड़ों तक दिखाई नहीं दे रहा। मैदानी इलाकों में भी कड़ाके की ठंड पड़ रही है। दिल्ली-एनसीआर में लोग कहने लगे हैं ‘आज तो मनाली-शिमला वाली फील आ रही है’। लेकिन ये ठंड हर किसी के लिए एक-सी नहीं होती। कुछ लोग एन्जॉय करते हैं तो कुछ ऐसे भी हैं जिनकी बॉडी ‘हल्की सी ठंड में ही कांपने लगती है’। और यही कंडीशन कहलाती है ‘कोल्ड इनटॉलरेंस’ यानि ठंड को बर्दाश्त ना कर पाना। हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक जिनको हद से ज्यादा ठंड लगती है उनके शरीर में आयरन की कमी हो सकती है। एनीमिया होने पर ज्यादा ठंड लगती है।
वहीं अगर हाथ-पैर ठंडे हैं, और शरीर का बाकी हिस्सा नॉर्मल है तो ब्लड का प्रॉपर सर्कुलेशन ना होना इसकी वजह है। वैसे शरीर में शुगर और थायराइड का बिगड़ना भी cold intolerance की एक बड़ी वजह है। क्योंकि मेटाबॉलिज्म स्लो हो जाता है और इससे शरीर में हीट जेनरेट नहीं हो पाती। कम वजन, डिहाइड्रेशन और विटामिन बी-12 की कमी को भी सर्दी में नजरअंदाज करना ठीक नहीं है और इसी ठंड का असर अब अस्पतालों में भी दिख रहा है। सर्दी-खांसी, ज़ुकाम, बुखार निमोनिया के मामले 45% तक बढ़ चुके हैं।
शुगर और हार्ट पेशेंट्स को खासतौर पर अलर्ट रहने की जरूरत है। ठंडी हवा सिर में चुभन बढ़ाती है। साइनस और टॉन्सिल्स ट्रिगर हो रहे हैं और अगर बॉडी अगर इस ठंड को बर्दाश्त नहीं कर पायी तो हाइपोथर्मिया का खतरा बन जाता है। क्योंकि अमूमन इंसान का नॉर्मल टेम्परेचर 37 डिग्री होता है और अगर ये 35 से नीचे गिरता है तो तेज कंपकंपी, थकान, सुस्ती और नींद आने लगती है जिसे नजरअंदाज करना खतरनाक है। तो सवाल साफ है ठंड से मुकाबले के लिए खुद को तैयार कैसे करें ? और इसका जवाब है योग और हेल्दी लाइफस्टाइल जो शरीर में अंदरूनी गर्मी नेचुरली पैदा करते हैं। ऐसे में चलिए स्वामी रामदेव से जानते हैं हाइपोथर्मिया से कैसे बचा जाए।
