बिहान मिशन के तहत 48 दीदियों का रांची व बिरसा कृषि विश्वविद्यालय में हुआ शैक्षणिक परिभ्रमण

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जशपुरनगर { गहरी खोज }: राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन “बिहान” के अंतर्गत जशपुर जिले की पशु सखियों को वैज्ञानिक पद्धतियों से अवगत कराने के उद्देश्य से एक प्रेरणादायक शैक्षणिक परिभ्रमण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम के तहत जिले से चयनित 48 पशु सखियों का दल 22 दिसम्बर 2025 को रांची कॉलेज ऑफ वेटरिनरी साइंस एंड एनिमल हसबेंड्री, रांची (झारखंड) पहुँचा, जहाँ उन्हें विभिन्न आजीविका गतिविधियों पर विस्तृत प्रशिक्षण दिया गया।
इस दल में मनोरा, दुलदुला, कुनकुरी और जशपुर विकासखंडों से चयनित पशु सखियां शामिल रहीं। प्रशिक्षण के दौरान उन्हें मुर्गी पालन, गौवंश पालन, शूकर पालन, बकरी पालन, भेड़ पालन एवं खरगोश पालन से संबंधित आधुनिक तकनीकों, यंत्रों एवं प्रबंधन विधियों की जानकारी दी गई तथा संबंधित प्रयोगशालाओं एवं प्रशिक्षण इकाइयों का अवलोकन भी कराया गया।
प्रशिक्षण उपरांत पशु सखियों ने बिरसा कृषि विश्वविद्यालय, रांची का भी भ्रमण किया, जहाँ उन्होंने विश्वविद्यालय के पशु वैज्ञानिकों एवं विशेषज्ञों से प्रत्यक्ष संवाद कर वैज्ञानिक दृष्टिकोण से पशुपालन की बारीकियाँ समझीं। इस दौरान उन्होंने स्वदेशी पशु नस्लों का भी अवलोकन किया तथा लैब सुविधाओं को नजदीक से देखा। यह संपूर्ण कार्यक्रम कलेक्टर रोहित व्यास के नेतृत्व एवं जिला पंचायत सीईओ अभिषेक कुमार के मार्गदर्शन में संचालित किया गया।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य पशु सखियों को वैज्ञानिक तरीकों से पशुपालन की जानकारी देकर उन्हें अपने-अपने ग्राम पंचायतों में पशुपालक किसानों को उन्नत तकनीकों से जोड़ने में सक्षम बनाना है। पशु सखियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि इस प्रकार के प्रशिक्षण और परिभ्रमण से उन्हें नवीन जानकारी प्राप्त हुई है, जिससे वे अपने क्षेत्र के पशुपालक किसानों को बेहतर मार्गदर्शन दे सकेंगी और उत्पादन बढ़ाने में सहायक सिद्ध होंगी। वहीं बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के पशु वैज्ञानिकों ने मुर्गी, गौवंश, शूकर, बकरी एवं भेड़ पालन से अधिक लाभ प्राप्त करने के तरीकों का व्यापक प्रचारदृप्रसार जशपुर जिले में करने की सलाह दी।
उल्लेखनीय है कि इस तरह के शैक्षणिक परिभ्रमण कार्यक्रम जशपुर जिले के सभी आठ विकासखंडों की पशु सखियों एवं कृषि सखियों के लिए आयोजित किए जाने प्रस्तावित हैं। इसका उद्देश्य बिहान से जुड़ी महिलाओं को अन्य जिलों एवं राज्यों की उन्नत पशुपालन, उद्यानिकी एवं कृषि तकनीकों से अवगत कराकर उन्हें उत्पादन एवं रोजगार से जोड़ना तथा शत-प्रतिशत महिलाओं को “लखपति दीदी” की श्रेणी में लाना है।

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