नीति आयोग की टीम ने किया एमडीयू का दौरा

नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने के प्रयासों की सराहना
रोहतक{ गहरी खोज }: नीति आयोग की एक उच्चस्तरीय टीम ने महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (एमडीयू) का दौरा किया। यह दौरा स्टेट यूनिवर्सिटीज में अनुसंधान, नवाचार और उद्यमिता विषय पर राष्ट्रीय अध्ययन के अंतर्गत आयोजित किया गया। नीति आयोग की टीम में सुश्री प्रतिभा, निखिल और भिवाल शामिल रहे, जिन्होंने एमडीयू के विद्यार्थियों, शोधार्थियों, शिक्षकों, स्टार्टअप संस्थापकों, उद्योग प्रतिनिधियों तथा विभिन्न हितधारकों से गहन संवाद किया। कुलपति प्रो. राजबीर सिंह ने इस अवसर पर कहा कि महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय सदैव अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध रहा है। हमारा प्रयास है कि यहां का हर छात्र केवल नौकरी तलाशने वाला न होकर समाज को रोजगार देने वाला उद्यमी भी बने। कुलपति प्रो. राजबीर सिंह ने कहा कि नीति आयोग का यह अध्ययन न केवल एमडीयू की उपलब्धियों को राष्ट्रीय स्तर पर रेखांकित करेगा बल्कि अन्य विश्वविद्यालयों के लिए भी प्रेरणा बनेगा। विश्वविद्यालय ने स्टार्टअप नीति और नवाचार-अनुकूल वातावरण के माध्यम से विद्यार्थियों को अपने विचारों को वास्तविकता में बदलने के लिए सशक्त किया है, ऐसा कुलपति का कहना था। डीन, एकेडमिक एफेयर्स प्रो. एस.सी. मलिक तथा कुलसचिव डॉ. कृष्णकांत ने भी टीम का स्वागत करते हुए कहा कि कुलपति के कुशल नेतृत्व में एमडीयू लगातार ऐसे प्रयास कर रहा है कि शिक्षा केवल डिग्री तक सीमित न रहकर व्यावहारिक जीवन में उपयोगी साबित हो। उन्होंने कहा कि नीति आयोग का यह दौरा हमारे प्रयासों को और ऊर्जा देगा तथा विश्वविद्यालय की उपलब्धियों को देशभर तक पहुंचाने में सहायक होगा।नीति आयोग टीम की प्रमुख सुश्री प्रतिभा ने एमडीयू की स्टार्टअप पॉलिसी और समावेशी पहलों की सराहना की। उन्होंने विशेष रूप से एमडीयू में इनक्यूबेटेड राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित स्टार्टअप डैफेटेरिया- द इनक्लूसिव फूड ट्रक की प्रशंसा की, जो दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण का उत्कृष्ट उदाहरण है। साथ ही आइसक्रीम वेंचर की भी सराहना की। टीम ने शोध एवं नवाचार में सक्रिय स्नातक, परास्नातक, डॉक्टरेट एवं पोस्ट-डॉक्टरेट स्तर के छात्रों के साथ संवाद किया। साथ ही, विश्वविद्यालय के 20 से अधिक वरिष्ठ अधिकारियों, संकाय सदस्यों, पूर्व छात्रों, इनक्यूबेटेड स्टार्टअप्स, जिला अधिकारियों, उद्यमियों, एमएसएमई प्रतिनिधियों, निवेशकों एवं मेंटर्स से भी अलग-अलग सत्रों में विचार-विमर्श किया गया।