रिकॉर्डतोड़ मतदान

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  • इरविन खन्ना

संपादकीय { गहरी खोज }: पश्चिम बंगाल में 92 प्रतिशत और तमिलनाडु में 84 प्रतिशत के मतदान ने भारतीय लोकतंत्र में मतदान का स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद का नया रिकॉर्ड कायम किया है। 2021 के विधानसभा चुनावों में 82.30 और तमिलनाडु में 73.63 प्रतिशत मतदान हुआ था। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, दोनों राज्यों में महिला वोटरों की भागीदारी पुरुष वोटरों से ज्यादा रही। पश्चिम बंगाल में महिला वोटरों का मतदान 92.69 प्रतिशत रहा, जबकि पुरुष वोटरों का मतदान 90.92 प्रतिशत रहा। जबकि पहले चरण में महिला वोटरों की संख्या (1.76 करोड़), पुरुष वोटरों (1.84 करोड़) से कम थी। तमिलनाडु में, महिला वोटरों का मतदान 85.76 प्रतिशत रहा, जबकि पुरुष वोटरों का प्रतिशत 83.57 प्रतिशत रहा। पश्चिम बंगाल में बाकी 142 सीटों पर वोटिंग का दूसरा चरण 29 अप्रैल को होगा। आम तौर पर चुनावों के दौरान ज्यादा वोटिंग होना इस बात का संकेत होता है कि मौजूदा सरकार के खिलाफ लोगों में काफी नाराजगी है। पश्चिम बंगाल में सत्ताधारी टीएमसी पिछले 15 साल से ममता बनर्जी की अगुवाई में सत्ता में है। विपक्षी भाजपा ने राज्य में सत्ताधारी पार्टी के खिलाफ जोरदार और पूरी ताकत से प्रचार अभियान छेड़ रखा है। तमिलनाडु में डीएमके 2021 से सत्ता में है। 10 साल के अंतराल के बाद डीएमके ने सत्ता में वापसी की थी, क्योंकि 2011 और 2016 में एआईएडीएमके ने लगातार दो विधानसभा चुनाव जीते थे। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार अनुसार आजादी के बाद से पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में यह अब तक का सबसे ज्यादा मतदान प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग दोनों राज्यों के हर वोटर को सलाम करता है।

रिकॉर्डतोड़ मतदान को लेकर विशेषज्ञों का मानना है कि मतदाता सूची के पुनरिक्षण का मुद्दा इतना गर्मा गया कि मतदान करने के लिए दूसरे राज्यों में रह रहे मतदाता विशेषतया मुस्लिम समाज के अपना मतदान करने वापस लौटे, क्योंकि उन्हें लगा कि अगर वह मतदान नहीं करेंगे तो उनका मत भविष्य में कट सकता है। मतदाता के मन में यह भय कांग्रेस और टीएमसी ने अपने चुनाव प्रचार में पैदा किया। भाजपा ने तृणमूल कांग्रेस को मात देने के लिए अपनी पूरी ताकत झोक दी। वामपंथियों ने अपने अस्तित्व को बनाये रखने के लिए चुनाव प्रचार में अपनी पूरी ताकत झोक दी। कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि सभी दलों द्वारा लगाई ताकत व मतदाता का अपने मत को लेकर जागरुक होने के परिणामस्वरूप ही यह रिकॉर्डतोड़ मतदान हुआ है। यह भारतीय लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत ही है।

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