पार्टी छोड़ने वाले सांसद गद्दार : मान
- इरविन खन्ना
संपादकीय { गहरी खोज }: मौसम विभाग ने पंजाब, हरियाणा, दिल्ली में पांच दिन लू चलने का अलर्ट अवश्य दिया था। पंजाबवासियों सहित दिल्ली और उत्तर भारत में लू से बचने को लेकर लोग सोच रहे थे कि इसी बीच पंजाब क्या देश की राजनीति में बवंडर तब आ गया जब आम आदमी पार्टी के 10 में से 7 राज्यसभा सदस्यों ने ‘आप’ को छोड़कर भाजपा में शामिल होने की घोषणा एक प्रैसवार्ता में कर दी। इस प्रैसवार्ता में राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल दिखाई दिए जबकि अन्य चार सांसदों हरभजन सिंह, स्वाति मालीवाल, विक्रमजीत साहनी और राजेन्द्र गुप्ता के राज्यसभा के अध्यक्ष को दिये पत्र में हस्ताक्षर थे।
‘आप’ के सात राज्यसभा सांसदों के भाजपा में शामिल होने से राज्यसभा में भाजपा की स्थिति पहले से बेहतर व मजबूत हो गई है। आम आदमी पार्टी के अब 3 सदस्य ही राज्यसभा में रह गए हैं। संजय सिंह, संत सीचेवाल और एनडी गुप्ता।
सांसद राघव चड्ढा को जिस दिन राज्यसभा में उपनेता के पद से हटाकर अशोक मित्तल को नेता बनाया गया था, तब राघव चड्ढा ने पोस्ट पर लिखा था, ‘घायल हूं घातक हूं’ राघव चड्ढा का वह घातकपन सामने आ गया है। पंजाब में आम आदमी पार्टी को यह एक बड़ा झटका है, जिससे उभर पाना केजरीवाल और उसके साथियों के लिए निकट भविष्य में मुश्किल होगा। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सात सांसदों का पार्टी को छोड़ना, विशेषतया संदीप पाठक जो पार्टी के संगठन मंत्री थे और राघव चड्ढा जो केजरीवाल के सबसे करीबी मान जाते थे, का पार्टी की छवि को कमज़ोर करने वाला कदम है।
सांसद अशोक मित्तल के ठिकानों पर ईडी के छापे ने उनकी कमजोरी जगजाहिर की और राघव चड्ढा व संदीप पाठक ने अवसर का लाभ उठाकर आम आदमी पार्टी को झटका देने के साथ-साथ पंजाब में राजनीतिक भूकंप ला दिया। संदीप पाठक और राघव चड्ढा 2022 के विधानसभा चुनावों में पंजाब में आम आदमी पार्टी के एक प्रकार से सर्वेसर्वा थे। मान सरकार बनने के पश्चात कुछ समय तक सत्ता के केंद्र बिन्दू बने रहे। अशोक मित्तल व मित्तल परिवार समय के साथ जालंधर में केजरीवाल के करीबी के रूप में ऊभर कर सामने आया। दिल्ली में अशोक मित्तल को सांसद के रूप में मिले निवास में केजरीवाल परिवार ही रहता था, जिसे अब केजरीवाल ने खाली कर दिया है।
उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट है कि पार्टी छोड़कर गये सात सांसदों में से तीन तो केजरीवाल के बहुत करीबी माने जाते थे। पार्टी छोड़ने पर पंजाब के मुख्यमंत्री मान ने इन सांसदों को गद्दार कहा है और अरविंद केजरीवाल ने इन्हें विश्वासघाती कहा है। समय और राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए आम आदमी पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल और पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान द्वारा दी गई प्रतिक्रियाओं को समझा जा सकता है। पार्टी छोड़कर गए सात सांसदों और भाजपा पर जो भी आरोप लगाये जा रहे हैं या जो कुछ कहा जा रहा है वह अपनी जगह है, लेकिन आम आदमी पार्टी के नेतृत्व को भी तो आत्मचिंतन करने की आवश्यकता है।
केजरीवाल ने राघव चड्ढा के बाद अशोक मित्तल या जिन पर सांसद के रूप में अरविंद केजरीवाल ने भरोसा किया आज उन सांसदों द्वारा पार्टी को जिस जगह पहुंचा दिया क्या इसके लिए आम आदमी पार्टी के नेतृत्व की रणनीति और सोच जिम्मेवार नहीं, यह प्रश्न भी आज उत्तर मांग रहा है।
पंजाब में पैदा हुई राजनीतिक स्थितियों ने एक बार फिर मुख्यमंत्री भगवंत मान को आम आदमी पार्टी और पंजाब की राजनीति के केंद्र बिन्दू के रूप में ला खड़ा किया है। पंजाब में आम आदमी पार्टी की स्थिरता के लिए जहां मुख्यमंत्री मान को सक्रिय होना होगा वहीं भविष्य की रणनीति बनाने में भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी। आज पंजाब में ‘आप’ का सबसे भरोसेमंद चेहरा मुख्यमंत्री भगवंत मान ही है, कल की ‘राम’ जाने।
