डिप्‍टी सीएम शिवकुमार की हाई कमान से बातचीत रूटीन मामला : जी. परमेश्वर

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बेंगलुरु{ गहरी खोज }: कर्नाटक के गृह मंत्री जी. परमेश्वर ने नई दिल्ली में पार्टी हाई कमान के साथ ‘डीके भाइयों’ (उप मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और पूर्व सांसद डीके सुरेश) की मुलाकात के बारे में कहा कि इस तरह की बातें राजनीति का ही हिस्सा हैं। उन्होंने सोमवार को बेंगलुरु में मीडिया से बात करते हुए कहा कि यही तो राजनीति की पहचान है और ऐसी स्थितियां स्वाभाविक हैं। मुख्यमंत्री सिद्दारमैया के साथ अपनी मुलाकात के बारे में उन्होंने कहा कि यह भी राजनीतिक गतिविधियों का ही एक हिस्सा है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष शिवकुमार राज्य से जुड़े मुद्दों और रक्षा क्षेत्र से संबंधित मामलों पर चर्चा करने के लिए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मिलने गए थे। परमेश्वर ने डीके शिवकुमार के उस बयान पर प्रतिक्रिया दी, जिसमें उन्‍होंने कहा है कि जो भी चर्चा हुई है, वह आखिरकार सामने आ ही जाएगी। प्रदेश के गृह मंत्री परमेश्‍वर ने कहा कि यह एक राजनीतिक बयान था और इस पर आगे किसी स्पष्टीकरण की जरूरत नहीं है। उन्होंने एक बैठक की और खाना खाने के बाद वापस लौट आए।
पीडब्‍ल्‍यूडी मंत्री सतीश जारकीहोली की इस टिप्पणी पर कि सरकार को अपने वादे पूरे करने में अहिंदा समुदायों की तरफ से रुकावटों का सामना करना पड़ रहा है, परमेश्वर ने कहा कि यह उनका निजी बयान था और इस पर उन्हें कोई टिप्पणी नहीं करनी है।
गृह मंत्री परमेश्वर ने जाति जनगणना रिपोर्ट के लिए कोई समय-सीमा तय न होने की चर्चा पर कहा कि अलग-अलग कारणों से इसमें देरी हो सकती है। उन्होंने कहा कि चुनाव, राजनीतिक घटनाक्रम और विधानसभा सत्र जैसे कारक समय-सीमा को प्रभावित कर सकते हैं, और इसमें कुछ और समय लग सकता है। इस मामले पर उनके पास विस्तृत जानकारी नहीं है और इस पर आगे टिप्पणी करना उनके लिए उचित नहीं होगा।
आइपीएल टिकटों की कालाबाजारी और एफआईआर दर्ज होने के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि अगर एफआईआर दर्ज हो गई है, तो पुलिस इसमें शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई करेगी। टिकटों की कालाबाजारी की कोई अनुमति नहीं है, और अगर कोई भी व्यक्ति अवैध रूप से टिकट बेचते हुए पाया गया, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। पुलिस आरोपों की जांच करेगी।
उन्होंने स्पष्ट किया कि टिकटों की बिक्री ऑनलाइन होती है और इस प्रक्रिया में सरकार की कोई सीधी भूमिका नहीं है, क्योंकि यह संबंधित अधिकारियों पर छोड़ दिया गया है। एफआईआर में बताई गई बातों की जांच की जाएगी।

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