बिहार के पूर्व उप मुख्यमंत्री सिन्हा ने सपत्नीक किए महाकाल के दर्शन

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उज्जैन{ गहरी खोज }: बिहार के पूर्व उप मुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने शनिवार को धर्मपत्नी सुशीला देवी के साथ मध्य प्रदेश के उज्जैन पहुंचकर विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग भगवान महाकाल के दर्शन किये। उन्होंने सपत्नीक भस्म आरती में शामिल होकर बाबा महाकाल का आशीर्वाद लिया और बिहार की समृद्धि, कल्याण, और सनातन संस्कृति की सकारात्मक ऊर्जा के लिए प्रार्थना की।
बिहार में इन दिनों नई सरकार के गठन की कवायद चल रही है। एक दिन पहले यानी शुक्रवार को ही बिहार के नए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने विश्वास मत जीता है। इसी बीच पूर्व उप मुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा शनिवार तड़के करीब चार बजे उज्जैन पहुंचे। यहां उन्होंने महाकालेश्वर मंदिर में नंदी हॉल में बैठकर भस्म आरती के दर्शन किए और भगवान महाकाल का स्मरण किया। आरती के बाद उन्होंने नंदी जी का पूजन-अभिषेक कर कान में अपनी मनोकामना भी कही। उन्होंने मंदिर के चांदी द्वार से भगवान महाकाल को जल अर्पित किया। इस दौरान पुजारियों ने विधि-विधान से उनका पूजन-अभिषेक कराया।
दर्शन के बाद पूर्व उप मुख्यमंत्री सिन्हा ने कहा कि कालों के काल महाकाल की नगरी उज्जैन में सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव हुआ। उन्होंने भगवान से प्रार्थना की कि हर बिहारी का गौरव बना रहे, सभी स्वस्थ रहें और महाकाल की कृपा सब पर बनी रहे।
शनिवार को वैशाख शुक्ल पक्ष की नवमी पर तड़के हुई भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल का भाग-चंदन से विशेष श्रृंगार किया गया। इस दौरान श्रद्धालुओं का भारी जनसैलाब उमड़ पड़ा। बाबा महाकाल के दर्शन के लिए भक्त देर रात से ही कतारों में लग गए थे।
मंदिर के पुजारी पंडित महेश शर्मा ने बताया कि महाकालेश्वर मंदिर में शनिवार तड़के हुई भस्म आरती में आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। सुबह 4 बजे मंदिर के पट खुलते ही पंडे-पुजारियों ने गर्भगृह में विराजित सभी देव प्रतिमाओं का विधिवत पूजन किया। इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक कर दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक किया गया।
भव्य श्रृंगार में बाबा महाकाल को रजत ‘ॐ’ बिल्वपत्र मुकुट, रुद्राक्ष की माला अर्पित की गई। मस्तक पर त्रिपुण्ड, त्रिशूल, डमरू और शेषनाग के रजत मुकुट से अलंकृत किया गया। इसके साथ ही रजत की मुंडमाल, रुद्राक्ष और सुगंधित पुष्पों की मालाएं पहनाई गईं, जिससे बाबा का स्वरूप अत्यंत आकर्षक नजर आया।
इसके बाद भगवान गणेश, माता पार्वती और कार्तिकेय का पूजन कर भगवान महाकाल को फल और मिष्ठान का भोग लगाया गया। कपूर आरती के पश्चात भस्म अर्पित कर विधिवत भस्म आरती की गई। इस दौरान भगवान को भस्म रमाई गई और श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दर्शन कर आशीर्वाद लिया।
महानिर्वाणी अखाड़ा की ओर से भी भगवान महाकाल को भस्म अर्पित की गई। मान्यता है कि भस्म अर्पित करने के बाद भगवान निराकार से साकार रूप में दर्शन देते हैं। भस्म आरती के दौरान पूरा मंदिर “जय महाकाल” के जयकारों से गूंज उठा।

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