कलकत्ता हाईकोर्ट ने बंगाल चुनाव से पहले बाइक की आवाजाही पर पाबंदी लगाने को लेकर ईसी को फटकारा

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कोलकाता{ गहरी खोज }: कलकत्ता हाईकोर्ट ने गुरुवार को पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले मोटरसाइकिलों के इस्तेमाल पर लगाए गए प्रतिबंध के मामले में चुनाव आयोग पर सवाल उठाए। अदालत ने कहा कि इस तरह के प्रतिबंधों से आम नागरिकों के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।
सुनवाई के दौरान जस्टिस कृष्णा राव ने चुनाव आयोग से पूछा कि चुनाव से ठीक पहले इस तरह की पाबंदियों की क्या आवश्यकता पड़ी। अदालत ने यह भी कहा कि आयोग को यह स्पष्ट करना चाहिए कि यह निर्णय किन परिस्थितियों और किन घटनाओं के आधार पर लिया गया।
जज ने टिप्पणी करते हुए कहा कि नागरिकों की स्वतंत्रता को इस तरह से पूरी तरह से सीमित नहीं किया जा सकता। उन्होंने यह भी कहा कि अगर सुरक्षा ही चिंता होती तो केवल मोटरसाइकिल ही नहीं बल्कि अन्य वाहनों पर भी रोक लगाई जा सकती थी। अदालत ने यह सवाल भी उठाया कि क्या पिछले कुछ वर्षों में ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें बाइक का उपयोग करके गंभीर अराजकता फैलाई गई हो।
इस पर चुनाव आयोग ने बताया कि वह शुक्रवार को अदालत में एक हलफनामा दाखिल करेगा, जिसमें इस फैसले के पीछे के कारणों को विस्तार से बताया जाएगा। आयोग यह भी जानकारी दे सकता है कि पहले ऐसे कौन से मामले सामने आए थे, जिनके आधार पर यह प्रतिबंध लगाया गया।
बता दें कि आयोग ने हाल ही में एक अधिसूचना जारी की थी, जिसमें कहा गया था कि चुनाव से दो दिन पहले मोटरसाइकिल की रैली पर पर रोक रहेगी। हालांकि, कुछ परिस्थितियों में सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक बाइक के उपयोग की अनुमति दी गई थी, लेकिन पीछे किसी सवारी को बैठाने की इजाजत नहीं होगी।
इसके अलावा, चुनाव के दिन भी सीमित समय के लिए बाइक चलाने की अनुमति दी गई है, बशर्ते उसका उपयोग केवल मतदान या किसी जरूरी कार्य के लिए किया जाए। अदालत ने इस पूरे मामले पर अगली सुनवाई में आयोग के जवाब का इंतजार करने को कहा है।
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि मोटरसाइकिलों पर लगाई गई पाबंदियां सभी परिस्थितियों में लागू नहीं होंगी। आयोग के अनुसार, ये नियम मेडिकल इमरजेंसी, पारिवारिक आवश्यकताओं या बच्चों को स्कूल ले जाने जैसी जरूरी स्थितियों पर लागू नहीं होंगे।
आयोग ने यह भी कहा है कि जो लोग सामाजिक या व्यक्तिगत कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए बाइक का उपयोग करते हैं, उन्हें भी इन प्रतिबंधों से छूट दी जाएगी। इसके अलावा, यह नियम ऐप-आधारित टैक्सी सेवाओं और फूड डिलीवरी जैसे जरूरी सेवाओं पर लागू नहीं होगा।
हालांकि, आयोग ने यह साफ किया है कि अगर कोई व्यक्ति इन पाबंदियों के बावजूद विशेष छूट चाहता है तो उसे स्थानीय पुलिस स्टेशन से लिखित अनुमति लेनी होगी। इसके बाद ही उसे प्रतिबंधों से राहत मिल सकेगी। इस आदेश को लेकर आपत्ति जताते हुए मामला कलकत्ता हाईकोर्ट में पहुंचा। बुधवार को अदालत का ध्यान इन निर्देशों की ओर आकर्षित किया गया, जिसके बाद अदालत ने इस मामले में याचिका दायर करने की अनुमति दे दी।
इस केस की सुनवाई गुरुवार को हुई। सुनवाई के दौरान जस्टिस कृष्णा राव ने मामले को गंभीरता से सुना और चुनाव आयोग से इस फैसले पर जवाब मांगा। अदालत ने अगली सुनवाई तक आयोग को हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है, जिसमें इन पाबंदियों के कारणों और उनके औचित्य को स्पष्ट किया जाएगा।

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