दुनिया के बीच मजबूत पुल की भूमिका निभाने को तैयार भारत : रिपोर्ट

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नई दिल्ली{ गहरी खोज }: ‘द टाइम्स ऑफ इजरायल’ के एक लेख में कहा गया क‍ि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बनने के अलावा, एक नया ग्लोबल सेंटर भी बनकर उभर रहा है, जो अलग-अलग देशों के बीच पुल का काम कर सकता है। ऐसे समय में जब दुनिया कई हिस्सों में बंटती जा रही है।
इस लेख में बताया गया है कि भारत ग्लोबल साउथ की मजबूत आवाज बन चुका है और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, दवाइयों, ऊर्जा बदलाव (एनर्जी ट्रांजिशन) और सुरक्षा सहयोग जैसे क्षेत्रों में अफ्रीका, खाड़ी देशों और दक्षिण-पूर्व एशिया के लिए एक पसंदीदा साझेदार है।
भारत को ऐसा देश माना जाता है जो वॉशिंगटन और ब्रुसेल्स से भी बात कर सकता है और साथ ही नैरोबी, अबू धाबी या जकार्ता में अपनी साख भी बनाए रखता है। लेख के मुताबिक, भारत का उभार “शांत तरीके से” हुआ है। यह एक तरह का सभ्यतागत पुनरुत्थान है, जिसमें देश के 1.4 अरब लोग और दुनियाभर में फैला उसका प्रवासी समुदाय शामिल है। सिलिकॉन वैली की बड़ी कंपनियों में भारतीय मूल के लोग अहम फैसले ले रहे हैं, ब्रिटेन में भारतीय मूल के नेता राजनीति को प्रभावित कर रहे हैं और खाड़ी देशों में भारतीय प्रोफेशनल्स पूरी अर्थव्यवस्था को संभालने में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं। भारत हर जगह मौजूद है। मेहमान की तरह नहीं, बल्कि एक असर डालने वाली ताकत के रूप में।
लेख में आगे कहा गया है कि भारत का करीब 3.5 करोड़ लोगों का प्रवासी समुदाय दुनिया के सबसे ताकतवर देशों और राजनीतिक सिस्टम में फैला है। अमेरिका में भारतीय मूल के लोग टेक्नोलॉजी और इनोवेशन के केंद्र में हैं और ऐसे फैसले लेते हैं जो ग्लोबल मार्केट को प्रभावित करते हैं।
यूनाइटेड किंगडम, जिसने कभी भारत पर राज किया था, आज वहां की राजनीति में भारतीय मूल के लोगों का गहरा असर है। वहीं, खाड़ी देशों में लाखों भारतीय मजदूरों से लेकर डॉक्टरों तक, छोटे कारोबारियों से लेकर बड़े अधिकारियों तक पूरी अर्थव्यवस्था की रीढ़ बने हुए हैं।
लेख यह भी बताता है कि भारत का उभार सिर्फ आर्थिक या राजनीतिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक भी है। दीपावली अब न्यूयॉर्क से लेकर मेलबर्न तक के सार्वजनिक स्थानों को रोशन करती है। होली जैसे त्योहार अब उन शहरों में भी मनाए जाते हैं, जिनका पहले भारत से कोई खास रिश्ता नहीं था।
भारतीय खाना भी अब ‘करी हाउस’ तक सीमित नहीं रहा। कैलिफोर्निया में डोसा ट्रक, लंदन में चाट बार और दुबई में बिरयानी चेन दिखाती हैं कि भारतीय स्वाद अब दुनिया के बड़े शहरों का हिस्सा बन चुके हैं। भारतीय फिल्में चाहे बॉलीवुड की बड़ी म्यूजिकल फिल्में हों या तमिल और तेलुगु सिनेमा अब स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स पर दुनिया भर में देखी जा रही हैं। लोग भले ही हिंदी या तमिल न समझें, लेकिन भारतीय कहानियों की भावनाओं को आसानी से महसूस कर लेते हैं।
इसके अलावा, लेख में क्रिकेट को भारत के बढ़ते सांस्कृतिक प्रभाव का सबसे बड़ा उदाहरण बताया गया है। जो खेल कभी औपनिवेशिक दौर में आया था, वह अब एक ग्लोबल बिजनेस बन चुका है, जिसे भारत की ताकत और सोच ने आकार दिया है। इंडियन प्रीमियर लीग अब सिर्फ भारत की लीग नहीं रही, बल्कि एक ऐसा मंच बन गई है, जहां दुनिया भर के बड़े निवेशक दिलचस्पी दिखाते हैं।

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