संघ प्रमुख मोहन भागवत ने संस्कृत के प्रचार-प्रसार के लिए नए केंद्रीय कार्यालय का किया उद्घाटन

0
202604203756379

नई दिल्ली{ गहरी खोज }: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने संस्कृत भारती के केंद्रीय कार्यालय का उद्घाटन किया। संस्कृत भारती के केंद्रीय कार्यालय के उद्घाटन अवसर पर देश के कई प्रमुख नेताओं और विद्वानों ने संस्कृत भाषा के महत्व पर जोर दिया।
भाजपा के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी ने समाचार एजेंसी से बात करते हुए कहा, “यदि देश में अधिकतर कार्य संस्कृत में होने लगें, तो यह भारत के लिए एक बड़ी उपलब्धि होगी। संविधान निर्माण के समय डॉ. भीमराव अंबेडकर ने संस्कृत को राष्ट्रभाषा बनाने का प्रयास किया था। जोशी के अनुसार संस्कृत न केवल भारत की, बल्कि पूरे विश्व की प्राचीन धरोहर है।
” कार्यक्रम में विश्व हिंदू परिषद के अंतर्राष्ट्रीय संरक्षक दिनेश चंद्र ने भी अपने विचार रखते हुए कहा कि संस्कृत को राष्ट्रभाषा का दर्जा मिलना चाहिए। संस्कृत को राष्ट्रभाषा होना चाहिए। इंद्रप्रस्थ का विकास पांडवों की कड़ी मेहनत से हुआ था, इसलिए उस आधार पर, इंद्रप्रस्थ नाम पर विचार किया जाना चाहिए। दिनेश चंद्र ने कहा, “संस्कृत को दुनिया की मूल भाषा माना जाता है। कई भारतीय और वैश्विक भाषाओं की उत्पत्ति संस्कृत से हुई है। संस्कृत भारती का उद्देश्य दुनिया भर में संस्कृत को बढ़ावा देना है।
वेदों जैसे मूलभूत ग्रंथों से लेकर अन्य शास्त्रीय कृतियों तक, ज्ञान संस्कृत में ही संरक्षित है।” दिल्ली सरकार में मंत्री प्रवेश वर्मा ने कहा, “संस्कृत भारती का आज दिल्ली में उद्घाटन हो रहा है। यह सौभाग्य की बात है कि संचालक द्वारा इसका उद्घाटन हो रहा है। संस्कृत का बहुत बड़ा स्थान है। विश्व की बहुत सारी भाषाएं संस्कृति से निकली हुई हैं और संस्कृत का उपयोग लोग अपने दिनचर्या में भी थोड़ा-थोड़ा उपयोग करने लगे हैं और यह हमारे लिए गौरव की बात है।” उन्होंने कहा कि इससे संस्कृति को देश में बढ़ाने के लिए और इसके महत्व को बढ़ाने के लिए यह बहुत बड़ा योगदान है।
आज यहां कार्यालय का उद्घाटन हो रहा है। मैं ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि यहां से इतनी शक्ति मिले कि पूरे देश के लोग अपने दिनचर्या में इसे उपयोग करें। केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति श्रीनिवास वरखेड़ी कहते हैं, “संस्कृत केवल एक भाषा नहीं है; यह एक सेतु है और हमारी ज्ञान परंपरा का स्रोत है। आज के ज्ञान-युग में संस्कृत का अत्यंत महत्व है।” लाल बहादुर शास्त्री नेशनल संस्कृत यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रोफेसर मुरली मनोहर पाठक कहते हैं, “शिक्षा में संस्कृत का बहुत महत्व है, क्योंकि भौतिक प्रगति की ओर अग्रसर होते हुए यदि हम अपने नैतिक मूल्यों को संरक्षित नहीं रखते, तो मानवता सुरक्षित नहीं रह सकती।”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *