एआई केवल तकनीकी नहीं, मानव क्रांति है : उपराष्ट्रपति

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नई दिल्ली{ गहरी खोज }: उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने बुधवार को कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) केवल एक तकनीकी क्रांति नहीं बल्कि एक “मानव क्रांति” है, जिसे अच्छे शासन और समावेशी समाज निर्माण के लिए जिम्मेदारी और दूरदृष्टि के साथ अपनाया जाना चाहिए।
उपराष्ट्रपति भारतीय लोक प्रशासन संस्थान (आईआईपीए) के 72वें स्थापना दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। उहोंने ‘सुशासन के लिए एआई’ विषय पर 5वां डॉ. राजेंद्र प्रसाद वार्षिक स्मृति व्याख्यान भी दिया। उन्होंने प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उनका जीवन सादगी, ईमानदारी और सार्वजनिक सेवा के मूल्यों का प्रतीक था। उन्होंने कहा कि सच्चा शासन सत्ता नहीं, बल्कि सेवा का माध्यम होता है। उपराष्ट्रपति ने कहा कि दुनिया आज एआई के युग में प्रवेश कर चुकी है, जहां मशीनें सीख रही हैं और सिस्टम सोचने लगे हैं। एआई सरकारों को नागरिकों की जरूरतों को बेहतर समझने और सेवाएं अधिक प्रभावी ढंग से प्रदान करने की क्षमता दे रहा है।
उन्होंने कहा कि 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में एआई महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। एआई से शासन अधिक तेज, पारदर्शी और जवाबदेह बन रहा है तथा योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में मदद मिल रही है।
देश की प्रगति का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश समावेशी शासन के लिए एआई का प्रभावी उपयोग कर रहा है। उन्होंने ‘भाषिणी’ जैसे एआई आधारित भाषा प्लेटफॉर्म का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे भाषाई बाधाएं दूर हो रही हैं। स्वास्थ्य क्षेत्र में एआई की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि टीबी स्क्रीनिंग, पोर्टेबल एक्स-रे और टेलीमेडिसिन प्लेटफॉर्म ‘ई-संजीवनी’ के माध्यम से दूर-दराज क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंच रही हैं। उन्होंने युवाओं से एआई और नई तकनीकों को अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि इससे नए अवसर पैदा होंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि एआई के उपयोग में नैतिकता, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना आवश्यक है।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि एआई का उपयोग समाज को अधिक न्यायपूर्ण, समावेशी और संवेदनशील बनाने के लिए किया जाना चाहिए। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री और आईआईपीए की कार्यकारी परिषद के अध्यक्ष डॉ. जितेंद्र सिंह, आईआईपीए के महानिदेशक डॉ. सुरेंद्र कुमार बागडे, तथा विशिष्ट अतिथि, संकाय सदस्य और प्रतिभागी उपस्थित थे।

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