भारत ने UN के दो-लेवल वाली स्थायी सदस्यता का किया विरोध

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नई दिल्ली{ गहरी खोज }: भारत लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की मांग कर रहा है। भारत ने एक बार फिर से संयुक्त राष्ट्र परिषद की सदस्यता और वीटो पावर को लेकर अपना पक्ष रखा है। यूएन में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पर्वतनेनी हरीश ने यूएनएससी में दो-लेवल वाले (टू टियर) स्थायी सदस्यता वाले स्तर का विरोध किया और जी4 के यूएनएससी में सुधार के बाद 15 साल के लिए वीटो पावर को टालने के प्रस्ताव पर सहमति जताई। बता दें, यूएनएससी में ‘टू-टियर’ स्थायी सदस्यता प्रस्ताव नए सदस्यों के लिए स्थायी सीटों की एक नई कैटेगरी बनाने की बात करता है। पी5 (अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस, ब्रिटेन) के पास अभी मौजूद वीटो पावर इन नए स्थायी सदस्यों में शामिल नहीं है। भारत इसका विरोध कर रहा है।
यूएन में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए पी हरिश ने कहा, सबसे पहले, दो मूल कारण हैं जिनकी वजह से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का ढांचा असंतुलित नजर आता है और उसकी वैधता व प्रतिनिधित्व पर सवाल उठते हैं, ये हैं सदस्यता और वीटो प्रणाली। इन दोनों पहलुओं में सुधार की आवश्यकता को लेकर व्यापक सहमति है। यह भी स्पष्ट है कि करीब 80 साल पहले बना यह ढांचा आज की बदलती भू-राजनीतिक वास्तविकताओं के अनुरूप नहीं रह गया है। इन मुद्दों पर पहले भी विस्तार से चर्चा हो चुकी है, और खास तौर पर वीटो व्यवस्था पर विचार-विमर्श अंतर-सरकारी वार्ताओं (आईजीएन) के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
भारत ने वीटो वाली स्थायी कैटेगरी को बढ़ाने पर जोर दिया और स्थायी प्रतिनिधि पी हरीश ने आगे कहा कि 60 के दशक में काउंसिल का एकमात्र सुधार, जिसमें सिर्फ अस्थायी कैटेगरी को बढ़ाया गया था, उससे वीटो रखने वालों की रिलेटिव ताकत बढ़ गई। तुलना करें तो, वीटो वाले स्थायी और अस्थायी सदस्यों का वास्तिवक अनुपात 5:6 था, लेकिन बाद में इसे बदलकर 5:10 कर दिया गया, जिससे वीटो रखने वालों को ज्यादा फायदा हुआ। कोई भी सुधार जिसमें वीटो वाली स्थायी कैटेगरी को नहीं बढ़ाया गया है, वह इस अनुपात को और खराब कर देगा और इस तरह, मौजूदा असंतुलन और असमानता को बनाए रखेगा। इसलिए, वीटो वाली स्थायी कैटेगरी को बढ़ाना, सुरक्षा परिषद में असली सुधार के लिए बहुत जरूरी है।
पी. हरीश ने कहा, सुरक्षा परिषद में असली सुधार के लिए वीटो के साथ स्थायी कैटेगरी को बढ़ाना बहुत जरूरी है। इस दौरान भारत ने जी4 की तरफ से ब्राजील के उपस्थायी प्रतिनिधि नॉरबर्टो मोरेटी के उस बयान पर सहमति जताई, जिसमें उन्होंने कहा कि काउंसिल में सुधार के लिए नए स्थायी सदस्यों को अपना वीटो इस्तेमाल करने से पहले 15 साल की देरी करनी चाहिए। भारत, ब्राजील, जर्मनी और जापान के साथ, जी4 नाम के समूह का सदस्य है जो मिलकर काउंसिल सुधार की वकालत करता है और सुधारे गए परिषद में स्थायी सीटों के लिए एक-दूसरे का समर्थन करता है।
मोरेटी ने कहा, इस मुद्दे (स्थायी सदस्यता) पर खुलापन और फ्लेक्सिबिलिटी दिखाने के लिए जी4 का प्रस्ताव है कि नए स्थायी सदस्य तब तक वीटो का इस्तेमाल नहीं करेंगे जब तक कि 15 साल की समीक्षा के दौरान इस मामले पर कोई फैसला नहीं हो जाता।

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