प्रस्तावित परिसीमन खतरनाक और संविधान पर हमला: सोनिया
नयी दिल्ली{ गहरी खोज }: कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी ने महिला आरक्षण को लेकर सरकार द्वारा इस सप्ताह संसद की तीन दिवसीय बैठक बुलाए जाने को पश्चिम बंगाल एवं तमिलनाडु के विधानसभा चुनावों में फायदा हासिल करने का प्रयास करार दिया और कहा कि असल मुद्दा प्रस्तावित परिसीमन है, जो ‘खतरनाक’ तथा ‘संविधान पर हमला’ है।
उन्होंने अंग्रेजी दैनिक ‘द हिंदू’ के लिए लिखे लेख में यह भी कहा कि लोकसभा की सीटों की संख्या में वृद्धि से संबंधित कोई भी परिसीमन राजनीतिक रूप से होना चाहिए। संसद के वर्तमान बजट सत्र के तहत दोनों सदनों की बैठक इस सप्ताह 16, 17 और 18 अप्रैल को होगी।
सोनिया गांधी ने लेख में कहा, ‘‘प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी विपक्षी दलों से उन विधेयकों का समर्थन करने की अपील कर रहे हैं जिन्हें सरकार उस समय संसद के विशेष सत्र में पारित करना चाहती है जब तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रचार अपने चरम पर होगा। इस असाधारण तरीके की जल्दबाजी का केवल एक ही कारण हो सकता है, वह है राजनीतिक लाभ प्राप्त करना और विपक्ष को रक्षात्मक मुद्रा में लाना।” उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री हमेशा की तरह सच्चाई से दूर हैं।
उनका कहना है, “संसद ने एक विशेष सत्र के दौरान सितंबर 2023 में नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 को सर्वसम्मति से पारित किया था। अधिनियम के माध्यम से संविधान में अनुच्छेद 334-ए जोड़ा गया, जिसने लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक तिहाई आरक्षण अनिवार्य कर दिया। यह अगली जनगणना और जनगणना-आधारित परिसीमन प्रक्रिया के पूरा होने के बाद लागू होगा।’’
उन्होंने कहा, ‘‘विपक्ष ने यह शर्त नहीं मानी थी। दरअसल, राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने 2024 के लोकसभा चुनाव से ही आरक्षण प्रावधान लागू करने की पुरजोर मांग की थी। सरकार इससे सहमत नहीं हुई।” कांग्रेस नेता ने सवाल किया कि अब इस रुख से ‘यू-टर्न’ लेने में प्रधानमंत्री को 30 महीने क्यों लग गए? उन्होंने इस बात का उल्लेख किया कि सरकार ने विपक्ष की ओर से की गई सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग को ठुकरा दिया।
सोनिया गांधी ने आरोप लगाया कि विधानसभा चुनावों के बीच संसद सत्र का आयोजन करना एक “गुप्त रणनीति” है जो निर्णय लेने के लिए प्रधानमंत्री के एकाधिकार और उनके ‘माई वे या हाइवे’ वाले दृष्टिकोण को दर्शाती है। कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष ने इस बात को याद दिलाया कि 73वें और 74वें संविधान संशोधन विधेयक क्रमशः अप्रैल 1993 और जून 1993 में संसद द्वारा पारित किए गए तथा उन विधेयकों पर लगभग पांच साल तक चर्चा और विचार विमर्श हुआ था, जिसके बाद पंचायतों और नगर पालिकाओं के चुनावों में महिलाओं के लिए आरक्षण कानून बना। उन्होंने कहा, “यह दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की एक अनोखी उपलब्धि थी।”
उन्होंने दावा किया कि पिछली दशकीय जनगणना 2021 में होनी थी, लेकिन मोदी सरकार इसे टालती रही, जिसका एक परिणाम यह हुआ है कि 10 करोड़ से अधिक लोग राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के तहत अपने कानूनी अधिकारों से वंचित हो गए हैं।
उनका कहना है कि इस सत्र को बुलाने और परिसीमन कराने की जल्दबाजी के लिए सरकार के बहाने स्पष्ट रूप से खोखले हैं। सोनिया गांधी ने कहा, “दरअसल, प्रधानमंत्री का असली इरादा अब जाति जनगणना को और विलंबित करना और पटरी से उतारना है।”
उन्होंने कहा, “विशेष सत्र 16 अप्रैल को शुरू होने वाला है। फिर भी, अब तक, सांसदों के साथ कोई आधिकारिक प्रस्ताव साझा नहीं किया गया है कि सरकार वास्तव में सत्र पर क्या विचार कराना चाहती है। ऐसा लग रहा है कि परिसीमन का कोई फॉर्मूला सुझाया जा रहा है। किसी भी परिसीमन से पहले पूर्व की भांति जनगणना प्रक्रिया होनी चाहिए। और यह कहने की आवश्यकता नहीं है कि लोकसभा की सीटों की संख्या में वृद्धि से संबंधित कोई भी परिसीमन राजनीतिक रूप से होना चाहिए, न कि केवल अंकगणितीय रूप से। जो राज्य परिवार नियोजन में अग्रणी रहे हैं, उन्हें और छोटे राज्यों को पूर्ण या सापेक्ष में नहीं रखा जाना चाहिए।”
कांग्रेस नेता के अनुसार, सीटों की संख्या में समानुपातिक वृद्धि, सापेक्ष प्रभाव के नुकसान का कारण बन सकती है क्योंकि अलग-अलग राज्यों में सीटों की संख्या के बीच अंतर बढ़ जाता है। सोनिया गांधी का यह भी कहना है कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की महिलाओं के लिए आरक्षण प्रदान किया जाए।
उन्होंने कहा, “संसद का मानसून सत्र जुलाई के मध्य में शुरू होगा। अगर सरकार 29 अप्रैल के बाद सर्वदलीय बैठक बुलाती है, विपक्ष के साथ अपने प्रस्तावों पर चर्चा करती है, सार्वजनिक चर्चा के लिए समय देती है और फिर मानसून सत्र में संविधान संशोधन विधेयकों पर विचार करती है, तो आसमान नहीं गिर जाएगा।”
सोनिया गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार जिस प्रक्रिया का अनुसरण कर रही है वो अत्यंत ‘‘त्रुटिपूर्ण और अलोकतांत्रिक’’ है। उन्होंने कहा, “महिला आरक्षण यहां मुद्दा नहीं है। वह पहले ही तय हो चुका है। असली मुद्दा परिसीमन का है जिसके बारे में अब तक अनौपचारिक रूप से जानकारी उपलब्ध है। यह बेहद खतरनाक और संविधान पर हमला है।”
