क्या रोजाना 10000 कदम चलना जरूरी है? स्वामी रामदेव ने बताया वॉक करने से कौन सी बीमारी ठीक होगी
लाइफस्टाइल डेस्क { गहरी खोज }:आज के समय में लोगों के लिए वॉक करना एक टास्क बन चुका है। जबकि पहले के जमाने में लोग बिना वजह का भी दिनभर में 10000 चल लेते थे और यही वजह है कि लोग लंबी आयु तक जीवित रहते थे। आज के समय में लोग 10000 कदम चलने का टारगेट लेकर चलते हैं। 10000 कदम पूरे तो टास्क पूरा, लेकिन सवाल ये है कि क्या रोजाना 10000 कदम चलना जरूरी है। स्वामी रामदेव ने बताया रोजाना वॉक करने से कौन सी बीमारी दूर होती है।
एक वक्त था जब पैदल चलना लोगों के रोज़ के रुटीन में शामिल था, तब कदमों को गिनने की जरूरत नहीं पड़ती थी। लेकिन अब तो स्मार्टवॉच ही आपको बताती है कि चलने का टारगेट पूरा हुआ है या नहीं। डॉक्टर कहते हैं कि रोज़ 5 हज़ार कदम चलना भी काफी है, पर कुछ एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि कम से कम 10,000 कदम तो चलना ही चाहिए। दरअसल आप कितने स्टेप्स चलते हैं इन दिनों ये फिटनेस फॉर्मूला बन गया है। 10 हज़ार कदम की सलाह, 7 हज़ार की कोशिश और 4-5 हज़ार कदम पर संतुष्ट। अगर आप 10 हज़ार कदम चलते हैं तो लगता है जैसे चलने का एक दिन का प्रोजेक्ट कंप्लीट कर लिया है। लोगों को स्मार्चवॉच पर चमकते नंबर्स, स्क्रीन पर लक्ष्य हासिल किया का नोटिफिकेशन निश्चिंत तो कर देता है कि चलो आज का कोटा पूरा हो गया, लेकिन 10 हज़ार कदम की गिनती सेहत का कोई तयशुदा पासवर्ड नहीं है।
लेकिन हो तो यही रहा है, कोई रनिंग कर रहा होता है, कोई कान में ईयरफोन लगाए वॉक कर रहा होता है, ऑफिस से लेकर बाज़ार-घर तक लोग अपने स्टेप गिन रहे है। मतलब ये कि आप दिन में कितने कदम चलते है। ये कलाई पर बंधी मशीन को खुश करने की एक जद्दोजहद बन गई है। ऐसे में सवाल तो ये भी है वॉक का कौन सा तरीका बेहतर है? कौन सा वक्त सही है। देखिए वक्त कोई भी हो तरीका कोई भी हो, कदम बढ़ाते रहें और मकसद 8-10 हज़ार कदम पूरे करना नहीं। शरीर को एक्टिव रखना होना चाहिए क्योंकि सच्चाई तो ये है कि W.H.O के मुताबिक दुनियाभर में हर साल 32 लाख से ज़्यादा लोग शारीरिक निष्क्रियता की वजह से जान गंवा देते हैं।
जबकि सिर्फ पैदल चलना सेहत में चमत्कारी असर दिखाता है। इससे बीपी-कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल होते हैं, हार्ट हेल्दी रहता है। स्ट्रेस हार्मोन घटते और हैप्पी हार्मोन्स बढ़ते हैं। फोकस-क्रिएटिविटी बढ़ती है, याद्दाश्त तेज़ होती है और तो और पैरों की सबसे खतरनाक बीमारी वेरिकोज़ भी हमला नहीं कर पाती। यानि रोज़ पूरे दिन में सिर्फ 1 घंटा चलकर रोगों से जंग का मिशन बेहद आसान हो सकता है। यानि जीवन सिर्फ चलने का नाम है। चलते रहो सुबह-शाम।
