जगदलपुर में डीआरआई ने 16.528 किलो पैंगोलिन स्केल्स किया बरामद, तीन गिरफ्तार

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रायपुर{ गहरी खोज }: छत्तीसगढ़ में वन्यजीव तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) की नागपुर क्षेत्रीय इकाई ने एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश किया। अधिकारियों के अनुसार, मुंबई जोनल यूनिट के तहत काम कर रही डीआरआई की नागपुर यूनिट ने जगदलपुर में भारतीय पैंगोलिन के शल्क (स्केल्स) की अवैध तस्करी में शामिल एक सिंडिकेट को पकड़ने में सफलता हासिल की।
रविवार को चलाए गए इस ऑपरेशन के दौरान तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया। इनके पास से कुल 16.528 किलोग्राम भारतीय पैंगोलिन के शल्क बरामद किए गए हैं। अधिकारियों ने बताया कि यह कार्रवाई सटीक खुफिया जानकारी के आधार पर की गई।
अधिकारियों के मुताबिक, भारतीय पैंगोलिन को वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची-1 में रखा गया है, जिससे इसे सबसे उच्च स्तर का कानूनी संरक्षण मिलता है। इस कानून के तहत पैंगोलिन और उससे जुड़े किसी भी उत्पाद का व्यापार पूरी तरह प्रतिबंधित है। इसी के तहत बरामद 16.528 किलोग्राम शल्क को जब्त कर लिया गया है।
कार्रवाई के बाद सभी औपचारिकताएं पूरी कर गिरफ्तार आरोपियों और जब्त किए गए शल्क को आगे की कार्रवाई के लिए जगदलपुर रेंज के वन विभाग के रेंज अधिकारी को सौंप दिया गया है। अब इनके खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत आगे की कानूनी प्रक्रिया की जाएगी।
विशेषज्ञों के अनुसार, पैंगोलिन का शिकार मुख्य रूप से इसके मांस और शल्क के लिए किया जाता है। कुछ पारंपरिक चिकित्सा बाजारों और लग्जरी फैशन में इसके शल्क को गलत तरीके से औषधीय गुणों वाला माना जाता है। इसी वजह से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी मांग बनी रहती है, जो संगठित तस्करी और शिकार को बढ़ावा देती है। यही कारण है कि पैंगोलिन दुनिया का सबसे ज्यादा तस्करी किया जाने वाला स्तनधारी जीव बन चुका है।
डीआरआई ने अपने बयान में बताया कि 2025 से अब तक उन्होंने कई बड़े वन्यजीव तस्करी नेटवर्क को तोड़ा है। इनमें मध्य प्रदेश के उज्जैन में तेंदुए की खाल की तस्करी करने वाला गिरोह, सिवनी में बाघ के शावक की हत्या और उसके अंगों की तस्करी की कोशिश करने वाला नेटवर्क, भोपाल में तेंदुए की खाल की तस्करी और आंध्र प्रदेश के पिलेरु में पैंगोलिन शल्क की तस्करी करने वाला सिंडिकेट शामिल है।
अधिकारियों ने कहा कि इस तरह की लगातार कार्रवाई डीआरआई की सतर्कता, वन्यजीव संरक्षण के प्रति उसकी प्रतिबद्धता और पर्यावरण अपराधों के खिलाफ उसकी मजबूत इच्छाशक्ति को दर्शाती है। राज्य वन विभागों और अन्य एजेंसियों के साथ मिलकर डीआरआई देश-विदेश के तस्करी नेटवर्क को खत्म करने के लिए लगातार काम कर रही है।

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