शनिवार को पीपल के नीचे दीपक जलाते समय तेल में डाल दें यह 1 चीज

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धर्म { गहरी खोज } :सप्ताह का शनिवार का दिन न्याय के देवता भगवान शनि देव को समर्पित है। कहते हैं कि शनि देव व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार फल देते हैं। माना जाता है कि शनि देव की एक कृपा दृष्टि किसी भी व्यक्ति को रंक से राजा बना सकती है। वहीं शनि देव की कुदृष्टि राजा से रंक बना सकती है। ज्योतिषों की माने तो जब भी किसी राशि पर शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या चलती है तो उस व्यक्ति को मानसिक, शारीरिक और आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। तो चलिए जानते हैं शनि साढ़ेसाती और ढैय्या के प्रभाव को कम करने के उपाय के बारे में।

पीपल पेड़ की पूजा
शनिवार के दिन पीपल पेड़ की पूजा का विशेष महत्व है। इस दिन प्रात:काल उठकर पीपल वृक्ष में जल अर्पित और परिक्रमा करने से शनि देव की कृपा प्राप्त होती है। शनि दोष से मुक्ति पाने के लिए पीपल पेड़ की पूजा अत्यंत लाभकारी उपाय है। इसके अलावा शनिवार के दिन शाम के समय पीपल पेड़ के नीचे सरसों तेल का दीया भी जरूर जलाएं।

पीपल पेड़ के नीचे कैसे जलाएं दीया?
शनिवार की शाम को सूर्यास्त के बाद यानी शाम के समय ही पीपल पेड़ के नीचे मिट्टी का दीया जलाएं। दीया में शुद्ध सरसों का तेल रखें और साथ ही उसमें कुछ दाने काले तिल भी जरूर डालें। तिल शनि देव को अत्यंत ही प्रिय है। दीया जलाने के लिए गोल बत्ती का उपयोग करें। दीपक जलाते समय ॐ शं शनैश्चराय नमः मंत्र का जाप करें। इस मंत्र का जाप 11 या 21 बार करना शुभ होता है। तिल मिलाकर दीया जलाने से साढ़ेसाती और ढैय्या का प्रभाव कम होता है। इसके साथ ही जीवन में आ रही सभी तरह की बाधाएं भी दूर हो जाती हैं।

इन राशियों पर चल रही है शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या
मेष , कुंभ और मीन राशि पर शनि की साढ़ेसाती चल रही है, जबकि सिंह और धनु पर शनि की ढैय्या है। ऐसे में इन राशि के जातकों को शनिवार के दिन पीपल पेड़ की पूजा अवश्य करनी चाहिए। इन राशि के जातक शनिवार के दिन पीपल की 7 बार परिक्रमा भी जरूर करें।

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