एंटी-नारकोटिक्स सेल की बड़ी कार्रवाई, दिल्ली में फर्जी कॉल सेंटर पकड़ा

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नई दिल्ली{ गहरी खोज } : दिल्ली मध्य जिले के रणजीतनगर पुलिस स्टेशन के अंतर्गत गुरु अर्जुननगर में चल रहे एक फर्जी कॉल सेंटर का एंटी-नारकोटिक्स सेल ने भंडाफोड़ किया है। गुप्त सूचना पर एंटी-नारकोटिक्स सेल की टीम ने गुरु अर्जुननगर स्थित रतनलाल कॉम्प्लेक्स पर छापा मारा, जहां एक फर्जी कॉल सेंटर चल रहा था। पुलिस ने मौके से काल सेंटर के जरिए धोखाधड़ी कर रहे 12 आरोपियों को गिरफ्तार है। जिनमें 2 मालिक और 10 टेलीकॉलर शामिल हैं। कॉल सेंटर मालिक सौरभ निवासी पांडवनगर (28) और शाहनवाज निवासी शादीपुर जबकि टेली-कॉलर्स अंजलि, कशिश, रजनी, गनमैन, पूजा, कविता,मंजू,रक्षा, इमरान और अनु के रूप में पहचान हुई है।
जांच के दौरान पता चला कि आरोपी “आरडी सर्विसेज” नाम से फर्जी कॉल सेंटर चला रहे थे और फर्जी रोड साइड असिस्टेंस पॉलिसी बेचकर ग्राहकों को धोखा दे रहे थे। कॉल करने वाले लोग ग्राहकों से कभी बेतरतीब ढंग से तो कभी डाटा के माध्यम से संपर्क करते थे। इसके बाद ग्राहकों से झूठा दावा करते थे कि भारत में कहीं भी वाहन संबंधी किसी भी समस्या, जैसे टायर पंचर, गाड़ी खराब होना या अन्य आपात स्थिति में ग्राहक एक समर्पित हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करके तुरंत मौके पर सहायता प्राप्त कर सकते हैं।
विश्वास हासिल करने के लिए आरोपियों ने कैश ऑन डिलीवरी (सीओडी) की पेशकश करते थे कि उन्हें एक प्लास्टिक पॉलिसी कार्ड पहुंचाया जाएगा। ग्राहकों को कार्ड प्राप्त होने पर डिलीवरी करने वाले व्यक्ति को भुगतान करने का निर्देश देते थे। आरोपी आमतौर पर प्रति पॉलिसी 3 से 4 हजार रुपए वसूलते थे। पूछताछ के दौरान आरोपियों ने खुलासा किया कि वे छह महीनों से फर्जी कॉल सेंटर चला रहे थे। उन्होंने जानबूझकर ग्राहकों को दिए गए आधिकारिक हेल्पलाइन नंबर के रूप में कीपैड वाले मोबाइल फोन का इस्तेमाल किया।
पॉलिसी बिकने और पैसे मिलने के बाद ग्राहकों के कॉल रिसीव नहीं करते थे और उन्हें कभी कोई सहायता प्रदान नहीं की जाती थी। आरोपियों ने स्वीकार किया कि उनके पास इस तरह की सेवा संचालित करने के लिए कोई वैध पंजीकरण नहीं है। एंटी-नारकोटिक्स सेल ने मौके से एक कंप्यूटर सिस्टम, फर्जी प्लास्टिक पॉलिसी कार्ड, ग्राहक डेटा शीट और कॉल करने के लिए इस्तेमाल किए गए मोबाइल फोन बरामद किए हैं। गिरफ्तार किए गए सभी आरोपियों को बरामद वस्तुओं के साथ रणजीत नगर पुलिस स्टेशन को सौंप दिया गया। इसके बाद रणजीत नगर पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

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