सीएम विजयन कोई दैवीय हस्ती नहीं, उनका रवैया अहंकार दिखाता है: राहुल गांधी

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त्रिशूर{ गहरी खोज }: कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोमवार को कहा कि मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन कोई ‘दिव्य हस्ती’ नहीं हैं, जो केरल पर अकेले ही शासन करने में सक्षम हों, बल्कि यह राज्य ऐसे कई सक्षम नेताओं का घर है, जो विनम्रता और सहानुभूति से परिपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि खुद को अकेला काबिल लीडर बताना केरल के लोगों की बेइज्जती है। यह उनका अहंकार दिखाता है। इस तरह के मैसेज जनता और लेफ्ट के दूसरे नेताओं, दोनों को कमजोर करते हैं। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि केरल में चल रहा चुनावी मुकाबला कोई आम दो-तरफा लड़ाई नहीं है, बल्कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) के बीच एक चुपचाप बनी सहमति है, जो यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) को अकेली विरोधी ताकत के तौर पर दिखाती है।
त्रिशूर में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए उन्होंने मुख्यमंत्री विजयन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा। राहुल गांधी ने सवाल उठाया कि प्रधानमंत्री मोदी, जो अपने भाषणों में अक्सर धर्म का जिक्र करते हैं, केरल के दौरों के दौरान सबरीमाला सोने की तस्करी के कथित मामले पर चुप क्यों रहते हैं। उन्होंने तर्क दिया कि इस तरह की चुनिंदा चुप्पी से ऐसा लगता है कि वामपंथियों को बचाने या उनकी मदद करने की कोशिश की जा रही है।
राहुल गांधी ने आगे दावा किया कि जहां एक तरफ प्रधानमंत्री मोदी की आलोचना करने के लिए उन्हें केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई का सामना करना पड़ा है। वहीं, दूसरी ओर मुख्यमंत्री विजयन या उनके परिवार पर ऐसी कोई जांच-पड़ताल होती नहीं दिखती। यह बात भाजपा और वामपंथी नेतृत्व के बीच किसी राजनीतिक तालमेल होने की धारणा को और मजबूत करती है।
विजयन के चुनावी प्रचार के तरीके पर एक बार फिर ध्यान केंद्रित करते हुए कांग्रेस सांसद ने पूरे केरल में लगे उन पोस्टरों की भरमार की आलोचना की, जिनमें मुख्यमंत्री को प्रमुखता से दिखाया गया है। उन्होंने तर्क दिया कि इन पोस्टरों से यह धारणा बनती है कि शासन-प्रशासन की पूरी जिम्मेदारी केवल एक ही व्यक्ति पर टिकी है।
उन्होंने इस रवैये को ‘राजनीतिक अहंकार’ का प्रतीक बताते हुए इसकी तुलना प्रधानमंत्री मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व में देखने को मिलने वाली ‘केंद्रीकृत नेतृत्व शैली’ से की। कांग्रेस नेता ने आगे कहा कि लोकतांत्रिक नेतृत्व की नींव विनम्रता और सबको साथ लेकर चलने की भावना पर आधारित होनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि अपनी ही श्रेष्ठता साबित करने का कोई भी प्रयास संस्थागत संतुलन और जनता के सम्मान को कमजोर करता है।

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