फर्जी दस्तावेजों से गुमराह कर रही कांग्रेस, होगी कार्रवाई: हिमंत

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गुवाहाटी{ गहरी खोज }: असम की राजनीति में एक नया विवाद सामने आया है, जहां मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कांग्रेस नेताओं पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि हाल ही में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया, जिसका उद्देश्य चुनावी माहौल को प्रभावित करना था।
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि कांग्रेस नेताओं पवन खेड़ा और गौरव गोगोई ने एक ही मुद्दे पर दिल्ली और गुवाहाटी में प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने आरोप लगाया कि इन प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रस्तुत किए गए दस्तावेज फर्जी थे। हिमंत बिस्वा सरमा के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति फर्जी दस्तावेजों के जरिए जनता को गुमराह करने की कोशिश करता है, तो उस पर भारतीय दंड संहिता की धारा 420 और 468 के तहत मामला दर्ज किया जा सकता है।
नए भारतीय न्याय संहिता में ऐसे मामलों के लिए कड़े प्रावधान हैं, खासकर जब इनका उद्देश्य चुनाव परिणाम को प्रभावित करना हो। मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि उनकी पत्नी ने इस मामले में एफआईआर दर्ज कराई है और उन्हें भरोसा है कि पुलिस उचित धाराओं में मामला दर्ज कर कार्रवाई करेगी।
उन्होंने यह भी दावा किया कि उनकी टीम की जांच में सामने आया है कि प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस्तेमाल की गई सामग्री एक पाकिस्तानी सोशल मीडिया ग्रुप से ली गई थी। हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि पिछले 10 दिनों में पाकिस्तान के चैनलों पर असम चुनाव को लेकर कई चर्चाएं हुई हैं, जिनमें कांग्रेस के पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश की गई। पासपोर्ट से जुड़े आरोपों पर बोलते हुए सरमा ने कहा कि यूएई का असली पासपोर्ट एक पाकिस्तानी व्यक्ति द्वारा सोशल मीडिया पर डाला गया था जबकि कांग्रेस द्वारा दिखाए गए दस्तावेजों में कथित रूप से एआई के जरिए छेड़छाड़ की गई। उन्होंने यह भी कहा कि मिस्र का पासपोर्ट भी फर्जी है और इसकी पुष्टि इंटरनेट के जरिए की जा सकती है। इसके अलावा, उन्होंने आरोप लगाया कि बहुत कम रकम में कोई भी कंपनी रजिस्टर कर सकता है और इसी का इस्तेमाल करके नए नामों से कंपनियां बनाई गईं। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस ने पाकिस्तानी सोशल मीडिया स्रोतों से प्राप्त दस्तावेजों का इस्तेमाल किया और इससे यह संकेत मिलता है कि असम चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। हालांकि, हिमंता सरमा ने यह भी स्पष्ट किया कि वे यह नहीं कह रहे कि इन दस्तावेजों के पीछे कौन है और यह जांच एजेंसियों पर छोड़ दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सच्चाई सामने लाने के लिए विस्तृत जांच आवश्यक है।

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