4 अप्रैल का पंचांग : बैशाख कृष्ण की द्वितीया तिथि, नोट कर लें भद्रा व शुभ-अशुभ समय

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नई दिल्ली{ गहरी खोज }: सनातन धर्म में पंचांग का बेहद महत्व है। इसके पांचों अंगों नक्षत्र, योग, करण, वार और पक्ष के आधार पर ही दिन की शुरुआत व शुभ-अशुभ समय का निर्धारण होता है। 4 अप्रैल को शनिवार, बैशाख मास कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि है।
इस दिन कई महत्वपूर्ण योग और मुहूर्त बन रहे हैं। भद्रा का समय भी है, इसलिए कुछ शुभ कार्यों में सावधानी बरतनी चाहिए। शनिवार को सूर्योदय 6 बजकर 8 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 6 बजकर 41 मिनट पर होगा। चंद्रोदय शाम 9 बजकर 1 मिनट पर होगा। कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि सुबह 10 बजकर 8 मिनट तक, इसके बाद कृष्ण तृतीया रहेगी।
हालांकि, उदयातिथि के अनुसार पूरे दिन द्वितीया का ही मान होगा। स्वाती नक्षत्र शाम 9 बजकर 35 मिनट तक, इसके बाद विशाखा व हर्षण योग दोपहर 2 बजकर 17 मिनट तक और गर करण सुबह 10 बजकर 8 मिनट तक रहेगा। 4 अप्रैल को भद्रा का समय होने के कारण कुछ शुभ कार्यों में सावधानी बरतनी चाहिए।
अमृत काल और सर्वार्थ सिद्धि योग में कोई भी शुभ काम शुरू करना फलदायी रहेगा। राहुकाल में यात्रा या नया काम शुरू करने से बचें। शुभ मुहूर्त की बात करें तो 4 अप्रैल को ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 36 मिनट से 5 बजकर 22 मिनट तक रहेगा। अभिजित मुहूर्त दोपहर 11 बजकर 59 मिनट से 12 बजकर 49 मिनट तक, विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 30 मिनट से 3 बजकर 20 मिनट तक और गोधूलि मुहूर्त शाम 6 बजकर 39 मिनट से 7 बजकर 2 मिनट तक रहेगा।
वहीं, अमृत काल दोपहर 11 बजकर 59 मिनट से 1 बजकर 44 मिनट तक और सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 6 बजकर 8 मिनट से शाम 9 बजकर 35 मिनट तक रहेगा। शनिवार को अशुभ समय की बात करें तो राहुकाल सुबह 9 बजकर 16 मिनट से 10 बजकर 50 मिनट तक, यमगंड दोपहर 1 बजकर 58 मिनट से 3 बजकर 32 मिनट तक, गुलिक काल सुबह 6 बजकर 8 मिनट से 7 बजकर 42 मिनट तक और दुर्मुहूर्त सुबह 6 बजकर 8 मिनट से 6 बजकर 58 मिनट तक रहेगा। शनिवार को भद्रा की छाया भी रहेगा। रात 11 बजकर 1 मिनट से अगले दिन सुबह 6 बजकर 7 मिनट तक भद्रा रहेगी।

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