दिल्ली पुलिस की बड़ी उपलब्धि, सीसीटीएनएस प्रगति डैशबोर्ड पर पहला स्थान बरकरार

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नई दिल्ली{ गहरी खोज }: दिल्ली पुलिस ने एक बार फिर टेक्नोलॉजी-आधारित पुलिसिंग और डेटा गवर्नेंस में अपनी लीडरशिप साबित की है। दिल्ली पुलिस ने सीसीटीएनएस प्रगति डैशबोर्ड पर सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में पहला स्थान हासिल किया है। इसके साथ ही सीसीटीएनएस ऑपरेशन्स के लिए प्रतिष्ठित आईएसओ 9001:2015 क्वालिटी मैनेजमेंट सिस्टम (क्यूएमएस) सर्टिफिकेशन भी प्राप्त किया है।
दिल्ली पुलिस ने अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर 2025 में लगातार तीन महीनों तक 100 प्रतिशत स्कोर हासिल किया था और जनवरी 2026 में भी शीर्ष स्थान बनाए रखा। इसी शानदार निरंतरता को बनाए रखते हुए फरवरी 2026 में भी दिल्ली पुलिस ने पहला स्थान हासिल किया, जो डिजिटल पुलिसिंग और डेटा मैनेजमेंट में उसकी लगातार उत्कृष्टता को दर्शाता है।
यह उपलब्धि संगठन की ‘नवीन न्याय संहिता’ को प्रभावी ढंग से लागू करने और ‘अपराध और अपराधी ट्रैकिंग नेटवर्क और सिस्टम’ (सीसीटीएनएस) तथा ‘इंटर-ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम’ (आईसीजेएस) के तहत राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस प्लेटफॉर्म का मजबूती से उपयोग करने के प्रति उसकी गहरी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
सीसीटीएनएस प्रगति डैशबोर्ड को गृह मंत्रालय और राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड्स ब्यूरो मॉनिटर करते हैं। इस डैशबोर्ड के आधार पर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का मूल्यांकन डेटा की गुणवत्ता, समय पर अपडेट, मात्रा और सटीकता के आधार पर किया जाता है। इसमें पुलिस थानों की कनेक्टिविटी, डिजास्टर रिकवरी सेंटर की स्थापना, डेटा एंट्री, पुराना डेटा माइग्रेशन, स्टेट और नेशनल डेटा सेंटर में डेटा सिंक्रोनाइजेशन जैसी चीजें शामिल हैं। इसके अलावा, एफआईआर की इलेक्ट्रॉनिक सबमिशन, नागरिक सेवाएं, और आईसीजेएस की नियमित समीक्षा बैठकें भी महत्वपूर्ण मानक हैं।
दिल्ली पुलिस लगातार शीर्ष स्थान हासिल करने में सक्षम रही क्योंकि हर जिले और इकाई में डेटा की अनुशासन, समन्वय और समय पर अपडेट की प्रक्रिया बहुत सख्त है। इस उपलब्धि को और मजबूत करने के लिए दिल्ली पुलिस को आईएसओ 9001:2015 क्यूएमएस सर्टिफिकेशन भी मिला है। यह सर्टिफिकेशन सीसीटीएनएस ऑपरेशन्स की पूरी प्रक्रिया को कवर करता है, जिसमें डिजिटल क्राइम रिकॉर्ड्स जैसे एफआईआर, शिकायतें, जांच रिकॉर्ड्स, अंतर-राज्य डेटा शेयरिंग और सभी पुलिस स्टेशनों और जिलों में सहज इंटीग्रेशन शामिल है।
इस सफलता के पीछे क्राइम ब्रांच सीसीटीएनएस टीम का बहुत बड़ा योगदान है। उन्होंने डेटा की गुणवत्ता और अनुपालन की लगातार निगरानी की, जिलों और पुलिस थानों के साथ रियल-टाइम समन्वय किया, तकनीकी और प्रक्रियागत चुनौतियों को समय पर हल किया और लगातार ट्रेनिंग और गाइडेंस प्रदान की।
जिलों की भी इसमें बड़ी भूमिका रही है। सभी पुलिस जिलों ने समयसीमा का सख्ती से पालन किया, जांच रिकॉर्ड्स को सही समय पर अपडेट किया, डेटा का प्रभावी डिजिटाइजेशन किया और तकनीकी टीमों के साथ मजबूत समन्वय बनाए रखा।
इस उपलब्धि में कई वरिष्ठ अधिकारियों का योगदान भी अहम रहा। डीसीपी आदित्य गौतम ने रणनीतिक मार्गदर्शन दिया और सुनिश्चित किया कि कार्य राष्ट्रीय मानकों के अनुसार हो। एसीपी मुकेश राठी ने ऑपरेशनल समन्वय और जिलों के बीच संचार सुनिश्चित किया। इंस्पेक्टर राजीव श्रीवास्तव ने रियल-टाइम मॉनिटरिंग और समस्या समाधान में मदद की। इनकी संयुक्त कोशिशों ने डेटा की गुणवत्ता, सिस्टम की क्षमता और निरंतर प्रदर्शन सुनिश्चित किया।
दिल्ली के पुलिस कमिश्नर सतीश गोलचा ने सभी जिलों, इकाइयों और क्राइम ब्रांच सीसीटीएनएस टीम को बधाई दी और उनकी मेहनत, प्रोफेशनलिज्म और टीमवर्क की सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसी उच्च मानक की तकनीक-आधारित और नागरिक-केंद्रित पुलिसिंग बनाए रखना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस भविष्य में भी तकनीक और वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं का उपयोग कर जनता को बेहतर सेवाएं देने, एक सुरक्षित और जवाबदेह पुलिसिंग सिस्टम सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

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