देश में लोकतंत्र पर खतरे के संकेत : अशोक गहलोत

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जयपुर{ गहरी खोज }: पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोमवार को सिविल लाइन्स स्थित आवास पर मीडिया से बातचीत करते हुए केंद्र सरकार और मौजूदा राजनीतिक हालात पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने देश में लोकतांत्रिक संस्थाओं पर दबाव और सामाजिक माहौल को लेकर चिंता जताई। केरल विधानसभा चुनाव को लेकर पूछे गए सवाल पर गहलोत ने कहा कि वहां लंबे समय से एलडीएफ और यूडीएफ के बीच सत्ता परिवर्तन का सिलसिला चलता रहा है। उन्होंने कहा कि पिछली बार कोरोना प्रबंधन को लेकर माहौल बनाया गया, लेकिन इस बार उन्हें उम्मीद है कि यूडीएफ की सरकार बनेगी। उन्होंने केरल की शिक्षा व्यवस्था की सराहना करते हुए कहा कि वहां आज़ादी से पहले से ही घर-घर शिक्षा का माहौल है और उनका सपना है कि राजस्थान में भी ऐसा ही वातावरण बने। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए गहलोत ने कहा कि देश में ऐसा माहौल बन रहा है, जहां एक मुख्यमंत्री को अपनी सुरक्षा की चिंता करनी पड़ रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि ईडी, इनकम टैक्स और सीबीआई जैसी एजेंसियों का दुरुपयोग हो रहा है और लोकतंत्र कमजोर हो रहा है। गहलोत ने कहा कि 2014 में नरेन्द्र मोदी को सीमित मत प्रतिशत के बावजूद देश का व्यापक समर्थन मिला, लेकिन उन्होंने इस समर्थन का उपयोग सर्वसमावेशी राजनीति के बजाय “कांग्रेस मुक्त” या “विपक्ष मुक्त” भारत जैसे नारों में किया।
उन्होंने आरएसएस और बीजेपी की विचारधारा पर सवाल उठाते हुए कहा कि “हिंदू खतरे में है” जैसे मुद्दों के जरिए लोगों को गुमराह किया जा रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री ने युवाओं, छात्रों और नई पीढ़ी से देश की वर्तमान परिस्थितियों को समझने और विचारधारात्मक रूप से जागरूक रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि केवल डिग्री और नौकरी ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह समझना भी जरूरी है कि देश किस दिशा में जा रहा है। गहलोत ने देश में बढ़ती आर्थिक असमानता पर भी चिंता जताई और कहा कि एक ओर लोग दो वक्त की रोटी के लिए संघर्ष कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर संसाधनों का असमान वितरण हो रहा है। उन्होंने कहा कि देश एक कठिन दौर से गुजर रहा है और जरूरत है कि जनता सच को समझे और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए सजग रहे।

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