प्रधानमंत्री ने नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के फेज-1 का किया उद्घाटन
नई दिल्ली{ गहरी खोज }: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर जिले के जेवर स्थित नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के प्रथम चरण (फेज-1) का शनिवार को उद्घाटन किया। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री के. राममोहन नायडू, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक एवं केशव प्रसाद मौर्य सहित कई गण्यमान्य मौजूद रहे। कार्यक्रम में केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री के राम मोहन नायडू ने कहा कि ‘उड़ान’ योजना के माध्यम से प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश के एविएशन सेक्टर में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। राजग सरकार के दौरान हवाई सेवाओं का विस्तार तेजी से हुआ है, जिसका लाभ आम नागरिकों तक पहुंच रहा है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने ‘उड़ान’ योजना को और सशक्त बनाते हुए इसे प्राथमिकता दी है, जिससे देश के दूर-दराज के क्षेत्रों को हवाई कनेक्टिविटी से जोड़ा जा रहा है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश में हवाई अड्डों और हवाई सेवाओं का तेजी से विकास हुआ है, विशेष रूप से उत्तर प्रदेश में इसका व्यापक प्रभाव देखने को मिला है।
अपने संबोधन में उन्होंने प्रधानमंत्री की कार्यशैली की सराहना करते हुए कहा कि वे निरंतर देश सेवा के लिए समर्पित हैं और ‘आत्मनिर्भर भारत’, ‘डिजिटल भारत’ और ‘विकसित भारत’ जैसे लक्ष्यों को लेकर निरंतर कार्य कर रहे हैं। करीब 11,200 करोड़ की लागत से विकसित यह एयरपोर्ट देश के सबसे बड़े ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट प्रोजेक्ट्स में से एक है। इसे पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल के तहत तैयार किया गया है। फेज-1 में एयरपोर्ट की सालाना यात्री क्षमता 12 मिलियन (एमपीपीए) होगी, जिसे भविष्य में बढ़ाकर 70 मिलियन तक किया जा सकेगा।
यह एयरपोर्ट 3,900 मीटर लंबे रन-वे से लैस है, जो बड़े विमानों के संचालन में सक्षम होगा। साथ ही इसमें आधुनिक नेविगेशन सिस्टम और अत्याधुनिक एयरफील्ड लाइटिंग जैसी सुविधाएं भी शामिल हैं, जिससे हर मौसम में 24×7 संचालन संभव होगा। नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को मल्टी-मॉडल ट्रांसपोर्ट हब के रूप में विकसित किया गया है, जिसमें सड़क, रेल, मेट्रो और क्षेत्रीय परिवहन प्रणालियों का सहज एकीकरण होगा। यह दिल्ली-एनसीआर के लिए दूसरे अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के रूप में कार्य करेगा और इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर दबाव कम करने में मदद करेगा।
एयरपोर्ट में एक अत्याधुनिक कार्गो हब भी विकसित किया गया है, जो शुरुआत में 2.5 लाख मीट्रिक टन सालाना कार्गो संभाल सकेगा और भविष्य में इसे 18 लाख मीट्रिक टन तक बढ़ाया जा सकेगा। इसके अलावा 40 एकड़ में मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल (एमआरओ) सुविधा भी बनाई गई है। पर्यावरण के लिहाज से यह परियोजना खास है, जिसे नेट-जीरो उत्सर्जन वाले एयरपोर्ट के रूप में विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसकी डिजाइन भारतीय सांस्कृतिक विरासत से प्रेरित है, जिसमें घाट और हवेलियों की झलक देखने को मिलती है। यमुना एक्सप्रेस-वे के किनारे स्थित यह एयरपोर्ट क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी को नई गति देने के साथ-साथ भारत को वैश्विक एविएशन हब बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
