अधिकारी द्वारा आत्महत्या

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suicide

-इरविन खन्ना
संपादकीय { गहरी खोज }:
पंजाब वेयर हाउस कॉरपोरेशन के जिला मैनेजर गगनदीप सिंह रंधावा ने जहरीला पदार्थ खाकर आत्महत्या कर ली। आत्महत्या से ठीक पहले उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर कैबिनेट मंत्री लालजीत सिंह भुल्लर पर मानसिक रूप से परेशान करने का आरोप लगाया। मामला सामने आने के बाद सीएम भगवंत मान ने मंत्री भुल्लर से कैबिनेट मंत्री के पद से इस्तीफा ले लिया। साथ ही मामले में जांच के आदेश दे दिए। मुख्य सचिव से इस संबंध में रिपोर्ट मांगी गई है। वीडियो में रंधावा ने मंत्री पर आरोप लगाया कि उन पर मानसिक दबाव बनाया जा रहा था। वरिष्ठ अधिकारियों को लिखे पत्र में उन्होंने आरोप लगाया कि मंत्री उन पर अपने पिता के नाम टेंडर दिलवाने का दबाव डाल रहे थे। पंजाब वेयरहाउस का टेंडर दिलवाने में जब वह असफल रहे तो घर बुलाकर मेरी पिटाई की गई और उसका वीडियो बनाया गया। 10 लाख रुपये रिश्वत लेने का फर्जी वीडियो तैयार करवाया गया। उनके परिवार को गैंगस्टरों से मरवाने की धमकियां दी गईं। जब यह तनाव वह नहीं झेल पाए तो आत्महत्या का फैसला लिया। डीएम गगनदीप सिंह रंधावा ने आत्महत्या करने से पहले समय-समय पर अधिकारियों को पत्र लिखकर मानसिक तनाव के बारे में बताया था। उनके शिकायत पत्र सामने आने के बाद इस बात का खुलासा हुआ है। डीसी को लिखे पत्र में उन्होंने अपनी पिटाई, अभद्र भाषा के इस्तेमाल और धमकियां देने का आरोप लगाया था। साथ ही टेंडर प्रक्रिया से जुड़े पहलुओं को भी विस्तार से अधिकारियों के ध्यान में लाया था। अब रंधावा के परिवार ने मामले को लेकर पुलिस को शिकायत दी है। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है और वीडियो सहित अन्य साक्ष्यों की जांच की जा रही है। सरकार की ओर से विशेष टीम बनाकर उच्च स्तरीय जांच की जा रही है।
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने उपरोक्त मामले में अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि अफसरों को परेशान करने के लिए पार्टी नहीं बनाई है। अधिकारी का आत्महत्या करना दुखद है, लेकिन यह जांच का विषय है। जांच से पहले ही कैबिनेट मंत्री से इस्तीफा ले लिया है, ताकि वह जांच प्रभावित न कर सकें। मुख्य सचिव को निष्पक्ष जांच के लिए कह दिया गया है।
आरोपी पूर्व मंत्री लालजीत भुल्लर का कहना है कि मेरे ऊपर जो आरोप लग रहे हैं वो बिल्कुल बेबुनियाद और झूठे हैं लेकिन हमारी पार्टी ने हमेशा सच का साथ दिया है। जब तक इस मामले में जांच पूरी नहीं हो जाती तब तक मैंने अपने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है ताकि जांच में मेरा मंत्री पद किसी भी तरह से बाधा न बने।
नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने कहा कि हिंदुस्तान के संविधान के मुताबिक यह खुदकुशी के लिए उकसाने का मामला है। इसलिए तुरंत आरोपी के खिलाफ केस दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जाए, हालांकि पंजाब पुलिस पर उन्हें भरोसा नहीं है, इसलिए वह मांग करते हैं कि मामले की सीबीआई से जांच कराई जाए। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने मांग की है कि मंत्री के खिलाफ मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार करें। यह घटना सरकार के ईमानदारी के दावे की असलियत उजागर करती है।
अकाली अध्यक्ष और पूर्व उपमुख्यमंत्री पंजाब सुखबीर बादल ने कहा है कि गगनदीप सिंह को पीटा गया और सिर पर पिस्तौल लगाकर धमकाया गया। उन पर 10 लाख रुपये की रिश्वत लेने की बात कबूल करने का दबाव बनाया गया, क्योंकि उन्होंने मंत्री के चहेते को टेंडर नहीं दिया।
लालजीत भुल्लर और गगनदीप रंधावा के बीच पीईजी गोदाम बनाने को लेकर विवाद शुरू हुआ था। सूत्रों के अनुसार कॉर्पोरेशन ने तरनतारन में 50 लाख मीट्रिक टन अनाज स्टोर करवाने के लिए टेंडर कॉल किया था।। इसके तहत सिर्फ जमीन शो करनी जरूरी होती है। टेंडर में मंत्री के पिता सुखदेव भुल्लर ने गोदाम के लिए जो जगह दिखाई थी, उसके ऊपर से हाईवोल्टेज तारें गुजर रही थी। इसलिए उनकी बिड मंजूर नहीं हुई। इसके बाद सुखदेव ने हाईवोल्टेज वाली जमीन की जगह दूसरी शो की। मगर दूसरी बार में बाबा नागा एग्रोटेक लिमिटेड ने भी बिड लगा दी। बाबा नागा ने सुखदेव के टेंडर से कम रेट दिए। इसलिए उस फर्म को टेंडर अलॉट कर दिया गया। आरोप है कि मंत्री इसी के टेंडर को लेकर डीएम पर दबाव बना रहे थे। इसे लेकर डीएम वेयरहाउस के उच्चाधिकारियों के साथ-साथ डीसी तरनतारन १६ मार्च 2026 को पत्र भी लिख चुके थे। इसमें उन्होंने मंत्री की ओर से पीटे जाने, परिवार को जान से मारने की धमकियां आदि देने का जिक्र भी किया था। आरोप लगाया था कि धमका कर उनका एक वीडियो रिकॉर्ड किया गया है। इसमें जबरन कहलवाया गया कि उसने टेंडर अलॉट करने के बदले में 10 लाख रुपए की रिश्वत ली है।
एक अधिकारी द्वारा आत्महत्या करने से पहले जो आरोप पूर्व मंत्री भुल्लर पर लगाए और जो पत्र उसने जिला के उच्चाधिकारियों को लिखा उससे स्पष्ट संकेत यही है कि मामला अति गंभीर है। मुख्यमंत्री मान ने मुख्य सचिव को छानबीन कर कार्रवाई करने के आदेश भी दे दिए हैं। लेकिन यह कार्रवाई अगर एक समय सीमा के बीच न हुई तो यह बात सरकार के लिए आने वाले समय में कई कठिनाईयां पैदा करेगी। विपक्ष इस मामले की गंभीरता को समझते हुए एकजुट है। पीड़ित परिवार भी सरकार की तरफ न्याय पाने के लिए आंखे लगाए बैठा है।
चुनाव सिर पर हैं। अगर जनता में यह संदेश गया कि सरकार मामले को गंभीरता से नहीं ले रही तो आम आदमी पार्टी व सरकार दोनों पर समय के साथ दबाव बढ़ता जाएगा। समय की मांग है कि सरकार मामले की गंभीरता को समझते हुए पीड़ित परिवार को न्याय और दोषी को सजा एक समय सीमा के बीच दे।

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