चुनाव के दौरान सोशल मीडिया विज्ञापनों के लिए आयोग के कड़े नियम

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नई दिल्ली{ गहरी खोज }: चुनाव आयोग (ईसीआई) ने आगामी विधानसभा चुनावों और उपचुनावों के मद्देनजर चुनावी विज्ञापनों और सोशल मीडिया के उपयोग को लेकर सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि अब किसी भी राजनीतिक दल या उम्मीदवार को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर विज्ञापन देने से पहले सरकारी समिति से अनुमति लेना अनिवार्य होगा।
निर्वाचन सदन की ओर से जारी की गई जानकारी के अनुसार असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के दौरान राजनीतिक दलों को मीडिया प्रमाणन और निगरानी समिति (एमसीएमसी) से विज्ञापनों का पूर्व-प्रमाणन करवाना होगा। इसके अलावा उम्मीदवारों को अपने प्रामाणिक सोशल मीडिया खातों का विवरण साझा करना होगा।
चुनाव आयोग ने 15 मार्च को 5 राज्यों में विधानसभा चुनावों और 6 राज्यों में उपचुनावों का कार्यक्रम घोषित किया। आयोग के आदेश के मुताबिक उम्मीदवार जिला स्तर की एमसीएमसी में और राजनीतिक दल राज्य स्तरीय एमसीएमसी में आवेदन कर सकते हैं। यदि कोई समिति के निर्णय से संतुष्ट नहीं है तो मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) की अध्यक्षता वाली ‘अपीलीय समिति’ में शिकायत की जा सकती है।
आयोग ने पारदर्शिता बढ़ाने के लिए उम्मीदवारों को निर्देश दिया है कि वे नामांकन दाखिल करते समय अपने प्रामाणिक सोशल मीडिया खातों का विवरण शपथ-पत्र में अनिवार्य रूप से दें। बिना पूर्व-प्रमाणन के इंटरनेट पर कोई भी राजनीतिक विज्ञापन जारी करना नियमों का उल्लंघन माना जाएगा।
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि ‘पेड न्यूज’ (सशुल्क समाचार) के मामलों पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी। साथ ही, चुनाव खत्म होने के 75 दिनों के भीतर राजनीतिक दलों को अपने डिजिटल प्रचार का पूरा खर्च आयोग को सौंपना होगा। इसमें वेबसाइट विज्ञापनों के लिए किया गया भुगतान, कंटेंट (वीडियो/ग्राफिक्स) बनाने पर हुआ खर्च, सोशल मीडिया अकाउंट के संचालन का खर्च शामिल है।

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