कार्बन ट्रेडिंग मंच सितंबर तक चालू होने की संभावना: सीईए चेयरमैन
नयी दिल्ली{ गहरी खोज }: केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) के चेयरमैन घनश्याम प्रसाद ने बृहस्पतिवार को कहा कि देश में कार्बन ट्रेडिंग मंच सितंबर तक चालू होने की संभावना है। यह कदम नवीकरणीय ऊर्जा बदलाव को गति प्रदान करेगा।
भारत ने 2030 तक 500 गीगावाट (एक गीगावाट बराबर 1,000 मेगावाट) नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। इसको देखते हुए यह महत्वपूर्ण है। देश में बिजली खरीद समझौतों (पीपीए) पर हस्ताक्षर की धीमी गति को देखते हुए यह नवीकरणीय ऊर्जा को अधिक व्यवहारिक बनाने में भी सहायक हो सकता है।
प्रसाद ने ‘इंडिया एनर्जी’ शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘कार्बन ट्रेडिंग मंच सही दिशा में आगे बढ़ रहा है और सितंबर तक इसके शुरू होने की पूरी संभावना है। संभवतः यह नवीकरणीय ऊर्जा को गति देने वाला कदम होगा और विशेष रूप से वाणिज्यिक और औद्योगिक क्षेत्रों को प्रोत्साहित करने वाला होगा।’’ उन्होंने यह भी बताया कि नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के लिए पीपीए पर हस्ताक्षर नहीं हो पा रहे हैं।
प्रसाद ने कहा, ‘‘हमने पाया कि पीपीए नहीं हो रहे हैं और अगर पीपीए नहीं हो रहे हैं, तो इसका मतलब है कि हमें इसे करने के लिए किसी अन्य संरचना की आवश्यकता है। इस तरह हम एक प्रकार की बाजार संरचना का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं जहां अधिक और बड़ी क्षमता आ सके और बाजार इसका समर्थन कर सके।’’
उन्होंने एक नई योजना के बारे में भी बात की, जिसके तहत तापीय बिजली घरों द्वारा प्लांट लोड फैक्टर (पीएलएफ) यानी क्षमता उपयोग को कम करने के लिए प्रोत्साहन दिया जाएगा, ताकि नवीकरणीय ऊर्जा को राष्ट्रीय बिजली ग्रिड में शामिल किया जा सके या संतुलित किया जा सके। सीईए के चेयरमैन ने कहा, ‘‘… अगर आप सभी (बिजली उत्पादक) यह कहते हैं कि हम बिजली उत्पादन को समायोजित नहीं कर सकते, तो यह कौन करेगा?… कहीं न कहीं उसे संतुलित करना होगा।’’ उन्होंने कहा कि यह तकनीकी रूप से संभव है और इसके लिए हमें लोगों को उचित प्रशिक्षण देने की आवश्यकता है।
प्रसाद ने कहा, ‘‘हम यह भी सोच रहे हैं कि क्या हम कोयला आधारित बिजलीघरों को कुछ और प्रोत्साहन दे सकते हैं क्योंकि वे बड़ी इकाइयां हैं और अब तक वे ही समर्थन करती रही हैं… इसलिए हम किसी प्रकार की प्रोत्साहन योजना के बारे में सोच रहे हैं।’’
उन्होंने कहा कि ऐसी ही एक योजना बिजली मंत्रालय को प्रस्तावित की गई है और उम्मीद है कि इसे मंजूरी मिल जाएगी। इससे तापीय क्षेत्र के लोगों की कुछ चिंताओं का समाधान होगा। वे पीएलएफ को स्वयं समायोजित करना चाहेंगे।
कार्यक्रम में बिजली एवं नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा राज्यमंत्री श्रीपद येसो नाइक ने कहा कि भारत का ऊर्जा बदलाव केवल एक आकांक्षा नहीं बल्कि एक सतत परिवर्तन है, जो स्पष्ट लक्ष्यों और निर्णायक निर्णयों पर आधारित है।
उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दृष्टिकोण के तहत, भारत ने 2030 तक 500 गीगावाट स्वच्छ ईंधन क्षमता का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है और 2070 तक शुद्ध रूप से शून्य कार्बन उत्सर्जन की ओर कदम बढ़ा रहा है।” नाइक ने कहा कि आज कुल स्थापित विद्युत क्षमता 520 गीगावाट से अधिक हो गई है, जिसमें से आधे से अधिक स्वच्छ ईंधन स्रोतों से प्राप्त होती है। हाल के वर्षों में सौर क्षमता तीन गुना से अधिक हो गई है और नवीकरणीय ऊर्जा अब हाशिये पर नहीं बल्कि मुख्यधारा में आ गई है।
