वीबी जी रामजी अधिनियम रोजगार का अधिकार छीन रहा : सिद्धारमैया

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चिक्काबल्लापुर{ गहरी खोज }: कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा कि वीबी जी रामजी अधिनियम ग्रामीण गरीबों के रोजगार के अधिकार को छीन रहा है और इसे निरस्त कर मनरेगा को बहाल किया जाना चाहिए। उन्होंने राज्य की जनता से कांग्रेस के राष्ट्रव्यापी आंदोलन का समर्थन करने की अपील की।
मुख्यमंत्री ने आज चिक्काबल्लापुर में आयोजित ‘नरेगा बचाओ’ आंदोलन में जनता को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि देशभर में ‘मनरेगा बचाओ’ अभियान शुरू किया गया है, क्योंकि केंद्र सरकार ने शीतकालीन सत्र के दौरान मनरेगा को निरस्त कर नया कानून लागू किया है।
सिद्धारमैया ने कहा कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम वर्ष 2005 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व में और सोनिया गांधी के मार्गदर्शन में लागू किया गया था। इस कानून का उद्देश्य श्रमिकों, आदिवासियों, छोटे किसानों और महिलाओं को 100 दिनों के रोजगार की कानूनी गारंटी देना था।
उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज के विचार को साकार करने में मनरेगा सहायक था। इसके तहत ग्राम पंचायतों और ग्राम सभाओं को कार्यों के चयन और क्रियान्वयन का अधिकार था। लेकिन नए कानून के तहत निर्णय का अधिकार केंद्र सरकार के पास केंद्रित किया जा रहा है, जिससे पंचायतों का स्वशासन प्रभावित होगा।
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि नए प्रावधानों के अनुसार केंद्र सरकार 60 प्रतिशत और राज्य सरकारें 40 प्रतिशत अनुदान देंगी, जिससे राज्यों के अधिकार और हित प्रभावित हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी की मांग है कि वीबी जी रामजी योजना को पूरी तरह समाप्त कर मनरेगा को पुनः लागू किया जाए, पंचायतों के अधिकार बहाल किए जाएं तथा देशभर में न्यूनतम मजदूरी 400 रुपये प्रतिदिन तय की जाए।
सिद्धारमैया ने कहा कि किसान विरोधी कानूनों की तरह यह संघर्ष भी तब तक जारी रहेगा, जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं। उन्होंने राज्य के नागरिकों से ग्रामीण गरीबों के हित में इस आंदोलन का समर्थन करने की अपील की।

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