अमित शाह ने कहा है तो तय समय में ही होगा अंत
सुनील दास
संपादकीय { गहरी खोज }: छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद कई दशक तक गंभीर समस्या रहा है. माना जाता था कि इसका कोई समाधान नहीं है,,इसका अंत कभी नहीं हो सकता.यह हमेशा बस्तर में रहेगा ही।इसलिए कोई सरकार कभी नहीं कहती थी वह नक्सली समस्या का अतं कर सकती है, कोई नेता कभी नहीं कहता था इस समस्या का समाधान किसी तय समय में हो सकता है।सब इसे नियंत्रित करने का प्रयास करते रहते थे और बस्तर के घन जंगलों में नक्सलवाद बना रहता था। पैसे खर्च होते थे, समय नष्ट होता था लेकिन नक्सली गतिविधियों पर रोक कभी नहीं लगती थी। बस्तर में नक्सलियों का समानांतर शासन चलता रहता था। सब कहते थे बस्तर मे अन्याय है,शोषण है इसलिए नक्सलवाद है।जल,जंगल,जमीन आदिवासियों से छीनी जा रही है इसलिए नक्सलवाद है।जब तक अन्याय,शोषण है,भ्रष्टाचार है बस्तर में नक्सलवाद रहेगा ही।
बस्तर में नक्सलवाद का सफाया करने की सोच किसी नेता में नहीं थी। इसलिए कई दशक तक नक्सलवाद गंभीर समस्या बना रहा।अमित शाह पहले ऐसे नेता के रूप में सामने आए जिन्होंने विश्वास से कहा कि बस्तर से नक्सलियों का सफाया हो सकता है। इसके लिए उन्होंने शुरुआत की और कोई बहुत समय नहीं हुआ है साय सरकार के दो साल के भीतर ही उनके प्रयास से आज राज्य में नक्सलवाद अंतिम सांस गिन रहा है।आज सब को भरोसा है कि अमित शाह ने कहा है तो बस्तर ही नहीं देश से नक्सलवाद का सफाया मार्च २६ तक हर हाल में हो जाएगा। अमित शाह ने अपने छत्तीसगढ़ प्रवास के दौरान फिर से अधिकारियों की समीक्षा बैठक की है और नक्सलियों के सफाए के लिए शेष बचे हुए दिनों में क्या किया जाना है, कैसे किया जाना है, अधिकारियों को समझा दिया है और अधिकारियों ने नक्ललियों के सफाए के लिए जो कुछ किया है उस पर संतोष व्यक्त किया है और उम्मीद जताई है कि तय समय में नक्सलियों का सफाया हो जाएगा तो भरोसा किया जा सकता है कि ऐसा होगा ही।
हर बार की तरह अमित शाह ने बस्तर प्रवास के दौरान फिर से एक बार कहा है कि बस्तर में हम गोली नहीं चलाना चाहते, जितने भी नक्सली बचे हैं वह हथियार डाल दें,हम उनका स्वागत करेंगे। अमित शाह ऐसा हर बार इसलिए कहते हैं कि भविष्य में कोई यह न कहे कि भाजपा सरकार ने बंदूक के दम पर नक्सलवाद का सफाया किया। गोली का जवाब गोली से देकर नक्सलवाद का सफाया गया। इस अभियान मे बस्तर के नक्सली बने लोग ही मारे गए हैं।इस अभियान में आदिवासी ही मारे गए हैं। अमित शाह जब भी आते हैं यह कहते जरूर है कि हम तो चाहते हैं कि नक्सलवाद समस्या का अंत बिना गोली चलाए हो जाए, सारे नक्सली शांति से हथियार सहित सरेंडर कर दें।नक्सली ऐसा नहीं करते हैं तो वह गोली चलाते हैं तो गोली का जवाब तो गोली से ही दिया जाता है और वह गोली से मारे जाते हैं।अमित शाह जैसा चाहते वैसा होता तो बस्तर में मौजूद कोई नक्सली गोली से नहीं मारा जाता । अमित शाह जैसा चाहते थे वैसा नहीं हुआ इसीलिए बड़ी संख्या में नक्सली मारे गए है, बड़ी संख्या में नक्सलियों का मारे जाने के बाद ही बडी़ संख्या में नक्सलियों ने सरेंडर किया है। अब गिनती के ही नक्सली बस्तर में बचे हैं, उनको सरेंडर का मौका दिया जा रहा है।
अमित शाह अपने छत्तीसगढ़ प्रवास के दौरान लोगों को यह भी जरूर बताते हैं कि छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद इसलिए रहा कि यहां कांग्रेस ने इसको संरक्षण दिया। वह ऐसा इसलिए कहते हैं कि कांग्रेस यहां सत्ता की दूसरी दावेदार है। वह सत्ता में आने का प्रयास जरूर करेगी। इसलिए यहां के लोगों को वह याद दिलाना नहीं भूलते है कि भूलकर भी उन लोगों को सत्ता में नहीं लाना जो नक्सलियों को संरक्षण देते थे। वह लोगों को याद दिलाते हैं कि बस्तर नक्सलवाद की संरक्षक कांग्रेस है और बस्तर में विकास का काम भाजपा ने किया है। शाह जानते हैं कि बस्तर से नक्सलवाद का सफाया तो भाजपा सरकार करेगी लेकिन इसका श्रेय लेने के लिए कांग्रेस भी सामने आएगी और कहेगी की बस्तर से नक्सलवाद के सफाए की शुरूआत तो कांग्रेस ने ही की थी। कांग्रेस की नीतियों को आगे बढ़ाकर भाजपा ने बस्तर से नक्सलवाद का सफाया किया है। यही वजह है शाह हमेशा कहते हैं कि कांगेस के कारण ही बस्तर में नक्सलवाद की समस्या रही। क्योंकि वह इसे संरक्षण देती थी।
अमित शाह भाजपा के ऐसे नेता हैं जो किसी काम का बीड़ा उठाते हैं तो वह उस काम को करके भी दिखाते हैं। पीेएम मोदी उनको ऐसा काम सौंपते हैं जो कोई और नेता नहीं कर पाता है।यूपी में भाजपा को चुनाव जिताने का काम पीएम मोदी ने शाह को सौंपा था तो यूपी में शाह ने भाजपा को जिताकर दिखाया था। वह भी तब जब भाजपा यूपी में कमजोर ही नहीं बहुत कमजोर थी। उसके सत्ता में आने की कोई उम्मीद नहीं थी। इसी तरह पीएम मोदी शाह को देश से आतंकवाद व नक्सलवाद का समाप्त करने का काम सौंपा तो आतंकवाद का तो देश से सफाया हो गया है और नक्सलवाद का सफाया अगले कुछ दिनों में हो जाएगा। देश में शाह को ऐसे नेता के रूप में हमेशा याद रखा जाएगा जिसने तारीख पहले तय की और नक्सलवाद का सफाया शुरू बाद में किया और समय से पहले करके दिखाया भी।
