निडुमपरंबिल क्रेडिट सिंडिकेट पर ईडी की बड़ी कार्रवाई, मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू

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नई दिल्ली{ गहरी खोज }:केरल में कथित वित्तीय धोखाधड़ी के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने निडुमपरंबिल क्रेडिट सिंडिकेट (एनसीएस ग्रुप) के प्रमोटरों और प्रमुख पदाधिकारियों के खिलाफ धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत जांच शुरू की है। यह कार्रवाई केरल पुलिस द्वारा दर्ज की गई कई एफआईआर के आधार पर की गई है। निर्धारित अपराध भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 420 (धोखाधड़ी) से संबंधित है।
ईडी की ओर से जारी प्रेस नोट में बताया गया कि प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि एनसीएस ग्रुप के पदाधिकारियों ने केरल के विभिन्न जिलों में बड़ी संख्या में निवेशकों को अत्यधिक मुनाफे का लालच देकर भारी रकम निवेश करने के लिए प्रेरित किया। आरोप है कि निवेशकों की जमा राशि न तो वापस की गई और न ही उन्हें वादा किया गया रिटर्न मिला, जिससे हजारों लोग आर्थिक रूप से प्रभावित हुए। ईडी की ओर से की गई बैंक खातों की गहन जांच में बड़े पैमाने पर वित्तीय लेनदेन, कई संबंधित संस्थाओं में धन का डायवर्जन और भारी नकद निकासी के संकेत मिले हैं।
इसके अलावा, जांच में यह भी संदेह जताया गया है कि धोखाधड़ी से जुटाई गई राशि का उपयोग राज्य के विभिन्न हिस्सों में अचल संपत्तियों में निवेश करने के लिए किया गया। प्रेस नोट में आगे कहा गया कि जांच के दौरान जुटाए गए ठोस साक्ष्यों के आधार पर प्रवर्तन निदेशालय ने धन शोधन निवारण अधिनियम की धारा 17 के तहत तलाशी अभियान चलाया।
इस दौरान महत्वपूर्ण दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड और अन्य सामग्री जब्त की गई, जो अपराध से अर्जित आय (प्रोसीड्स ऑफ क्राइम) का पता लगाने में सहायक मानी जा रही है। प्रवर्तन निदेशालय का कहना है कि मामले में आगे की जांच जारी है और आने वाले दिनों में इस घोटाले से जुड़े अन्य पहलुओं तथा संभावित आरोपियों पर भी कार्रवाई की जा सकती है।

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