भारत और श्रीलंका गहरे सभ्यतागत व आध्यात्मिक बंधनों से जुड़े हैं: प्रधानमंत्री मोदी
नई दिल्ली{ गहरी खोज }: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को कहा कि भारत और श्रीलंका “गहरे सभ्यतागत और आध्यात्मिक बंधनों” से जुड़े हैं। उन्होंने श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके को कोलंबो में भगवान बुद्ध के पवित्र देवनिमोरी अवशेषों की प्रदर्शनी का उद्घाटन करने के लिए धन्यवाद दिया।
गुजरात के अरावली जिले के देवनिमोरी पुरातात्विक स्थल से प्राप्त इन पवित्र अवशेषों की पहली अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी 4 से 11 फरवरी तक कोलंबो के गंगारामय मंदिर में आयोजित की जा रही है।
इसका उद्घाटन बुधवार को श्रीलंका के राष्ट्रपति दिसानायके ने गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत और उपमुख्यमंत्री हर्ष सांघवी के साथ किया। इस अवसर पर गंगारामय मंदिर के मुख्य भिक्षु वेन. किरिंदे अस्साजी थेरो भी उपस्थित थे।
राष्ट्रपति दिसानायके ने 4 फरवरी को ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए लिखा, “मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत सरकार का आभारी हूं, जिन्होंने अपने वादे को निभाया और इस पवित्र प्रदर्शनी को संभव बनाया।”
प्रधानमंत्री मोदी ने इस पोस्ट को साझा करते हुए कहा कि अप्रैल 2025 में उनकी श्रीलंका यात्रा के दौरान यह निर्णय लिया गया था कि ये अवशेष श्रीलंका लाए जाएंगे, जिससे लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित करने का अवसर मिलेगा।
उन्होंने कहा कि भगवान बुद्ध का करुणा, शांति और सद्भाव का शाश्वत संदेश मानवता का मार्गदर्शन करता रहे। यह प्रदर्शनी पहली बार भारत के बाहर इन अवशेषों की सार्वजनिक पूजा का अवसर है। इससे पहले भारत ने 2012 में कपिलवस्तु और 2018 में सारनाथ के अवशेषों की प्रदर्शनी श्रीलंका में आयोजित की थी।
