होसुर अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डा प्रस्ताव खारिज, डीएमके ने की प्रधानमंत्री से हस्तक्षेप की मांग की

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नई दिल्ली{ गहरी खोज }: तमिलनाडु के औद्योगिक शहर होसुर में अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे के प्रस्ताव को केंद्र सरकार द्वारा खारिज किए जाने पर द्रामुक के सांसद पी. विल्सन ने सोमवार को राज्यसभा में सवाल उठाए। सांसद पी. विल्सन ने सदन में विशेष उल्लेख के दौरान होसुर में प्रस्तावित हवाई अड्डे का विषय उठाते हुए इसमें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से हस्तक्षेप करने की मांग की।
पी विल्सन ने कहा कि होसुर तमिलनाडु का एक प्रमुख औद्योगिक और निर्यात केंद्र है, जो दक्षिण भारत के आर्थिक विकास में अहम भूमिका निभा रहा है। इसी को देखते हुए मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने विधानसभा के पटल पर होसुर अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे की स्थापना का वादा किया था।
हालांकि, केंद्र सरकार ने इस प्रस्ताव को यह कहते हुए अस्वीकार कर दिया कि बेंगलुरु अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे के निजी संचालक के साथ किए गए रियायत समझौते के तहत 150 किलोमीटर के दायरे में नया नागरिक हवाईअड्डा 2033 तक नहीं बनाया जा सकता।
रक्षा मंत्रालय ने भी मंजूरी नहीं दी। मंत्रालय ने होसुर क्षेत्र में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड और भारतीय वायुसेना की गतिविधियों से जुड़े नियंत्रित हवाई क्षेत्र का हवाला देते हुए रणनीतिक और सुरक्षा चिंताएं जताईं। जबकि देश के अन्य हिस्सों में समान परिस्थितियों में हवाईअड्डों को मंजूरी दी गई है।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने निजी कंपनियों के साथ ऐसे व्यावसायिक समझौते किए हैं, जो तमिलनाडु और उसके लोगों के अधिकारों की कीमत पर किए गए हैं और इसलिए वे प्रारंभ से ही अमान्य हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया के कई बड़े शहरों—जैसे लंदन और न्यूयॉर्क—में एक-दूसरे के बेहद करीब कई हवाईअड्डे सफलतापूर्वक संचालित हो रहे हैं।
भारत में भी नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डा, दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे से मात्र 90 किलोमीटर की दूरी पर विकसित किया जा रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री से होसुर अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डा परियोजना को तत्काल मंजूरी देने की मांग की ।

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