आतंकवाद पर भारत संदेश, जवाब दृढ़ और निर्णायक होगा : राष्ट्रपति मुर्मु

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नई दिल्ली{ गहरी खोज }: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने बुधवार को संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि भारत ने सिद्ध कर दिया है कि वह शक्ति का प्रयोग उत्तरदायित्व और विवेक के साथ करता है। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर से विश्व ने भारतीय सेना का शौर्य और पराक्रम देखा है तथा सरकार ने स्पष्ट संदेश दिया है कि भारत पर किसी भी आतंकी हमले का जवाब दृढ़ और निर्णायक होगा। राष्ट्रपति ने गुरु तेग बहादुर जी की पंक्ति का उल्लेख करते हुए कहा—“न किसी से डरें, न किसी को डराएं”, यही भारत की सुरक्षा नीति का मूल है।
अपने अभिभाषण में राष्ट्रपति ने कहा कि वर्ष 2026 के साथ भारत इस सदी के दूसरे चरण में प्रवेश कर चुका है। सदी के पहले 25 वर्षों में भारत ने अनेक सफलताएं, गौरवपूर्ण उपलब्धियां और महत्वपूर्ण अनुभव अर्जित किए हैं। बीते 10–11 वर्षों में देश ने हर क्षेत्र में अपनी नींव मजबूत की है, जो वर्ष 2047 तक विकसित भारत की तेज यात्रा का आधार बनेगी।
राष्ट्रीय विरासत का उल्लेख करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि बीता वर्ष भारत के तेज विकास और विरासत के उत्सव के रूप में स्मरणीय रहा। वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने पर देशभर में कार्यक्रम आयोजित हुए और बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय को नमन किया गया। उन्होंने गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी पर्व, भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती, सरदार पटेल की 150वीं जयंती और भारत रत्न भूपेन हजारिका की जन्म-शताब्दी समारोहों का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन राष्ट्रीय एकता और नई पीढ़ी को प्रेरणा देते हैं।
सामाजिक न्याय पर जोर देते हुए राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर समानता और सामाजिक न्याय के प्रबल पक्षधर थे। संविधान भी हमें यही प्रेरणा देता है कि हर नागरिक को बिना भेदभाव के उसका पूरा अधिकार मिले। उन्होंने कहा कि सरकार सच्चे सामाजिक न्याय के लिए समर्पित है और इसका परिणाम है कि पिछले एक दशक में 25 करोड़ से अधिक देशवासी गरीबी से बाहर आए हैं।
राष्ट्रपति ने बताया कि पिछले दस वर्षों में गरीबों के लिए चार करोड़ पक्के मकान बनाए गए, जिनमें से 32 लाख मकान केवल पिछले एक वर्ष में प्रदान किए गए। जल जीवन मिशन के तहत पांच वर्षों में साढ़े 12 करोड़ परिवारों तक नल से जल पहुंचाया गया। उज्ज्वला योजना के माध्यम से 10 करोड़ से अधिक परिवारों को एलपीजी कनेक्शन दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि डीबीटी के जरिए एक वर्ष में पौने सात लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि सीधे लाभार्थियों तक पहुंचाई गई, जिससे पारदर्शिता और ईमानदारी सुनिश्चित हुई।
स्वास्थ्य क्षेत्र का उल्लेख करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि आयुष्मान भारत योजना के तहत अब तक 11 करोड़ से अधिक मुफ्त इलाज किए जा चुके हैं। बीते डेढ़ वर्ष में लगभग एक करोड़ बुजुर्गों को वय वंदना कार्ड जारी किए गए। उन्होंने सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन, जापानी इंसेफ्लाइटिस पर नियंत्रण और ट्रेकोमा मुक्त भारत को बड़ी उपलब्धि बताया।
राष्ट्रपति ने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था वैश्विक संकटों के बावजूद दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बनी हुई है। महंगाई नियंत्रण, आय में वृद्धि और बचत बढ़ने से गरीब और मध्यम वर्ग को सीधा लाभ मिला है। उन्होंने यूरोपीय संघ के साथ हुए मुक्त व्यापार समझौते को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि इससे मैन्युफैक्चरिंग, सर्विस सेक्टर और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।
अंतरराष्ट्रीय भूमिका पर बोलते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि जटिल वैश्विक परिस्थितियों में भारत विश्व में एक सेतु की भूमिका निभा रहा है। युद्धरत देश भी भारत पर भरोसा जता रहे हैं। भारत ने संतुलन, निष्पक्षता और मानवीय दृष्टिकोण के साथ ‘इंडिया फर्स्ट’ के संकल्प को कायम रखा है। उन्होंने कहा कि ग्लोबल साउथ की आवाज को भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मजबूती से उठाया है और जी-20, ब्रिक्स, एससीओ जैसे मंचों पर भारत की भूमिका सशक्त हुई है।
राष्ट्रपति ने सुरक्षा के साथ-साथ आत्मनिर्भरता पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि मेक इन इंडिया, पीएलआई योजना और डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग से भारत की सामरिक क्षमता मजबूत हुई है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद मेड इन इंडिया रक्षा प्लेटफॉर्म्स पर वैश्विक भरोसा बढ़ा है। अभिभाषण के अंत में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सांसदों से राष्ट्रहित के मुद्दों पर एकमत होकर कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विकसित भारत का लक्ष्य किसी एक सरकार या पीढ़ी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक सतत यात्रा है, जिसे संसद, सरकार और नागरिक मिलकर पूरा करेंगे। राष्ट्रपति ने सभी सांसदों को सफल और सार्थक सत्र के लिए शुभकामनाएं दीं।

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