धान खरीदी पर राजनीति न हो,ऐसा हो नहीं सकता
सुनील दास
संपादकीय { गहरी खोज }: जब से छत्तीसगढ़ अलग राज्य बना है।धान खरीदी हो और उस पर राजनीति न हो ऐसा कभी हुआ नहीं है। धान खरीदी शुरू होने से पहले राजनीति शुरू हो जाती है और धान खरीदी समाप्त होने के बाद भी कुछ दिन राजनीति चलती रहती है।जो सत्ता में रहता है, मान लिया जाता है कि वह किसान हितैषी है क्योंकि किसानों ने वोट देकर उनकी सरकार बनाई है।जो सत्ता में नहीं रहता है माना जाता है कि उनको किसानों ने सत्ता देने के लायक नहीं समझा यानी किसानों ने उनको अपना हितैषी नहीं समझा इसलिए उनको सत्ता नहीं सौंपी। इसलिए जो सत्ता में नहीं है, उसकी कोशिश हमेशा किसानों को जनता को यह बताने की होती है कि सरकार किसान हितैषी नहीं, इससे किसानों को परेशानी हो रही है।
भाजपा सत्ता में है, सीएम साय मुख्यमंत्री हैं। माना जाता है कि भाजपा सरकार किसानों की हितैषी है, इसलिए चुनाव में जनता ने भाजपा को जिताया और कांग्रेस को नही जिताया। भाजपा दो साल में यह साबित करने में सफल रही है कि वह किसानों की हितैषी है, उसने हर साल किसानों का ज्यादा धान खरीदा है जितने में खरीदने का वादा चुनाव में किया उतने में खरीदा है और धान का पैसा भी कांग्रेस की तुलना मे किसानों को जल्द मिला है। कांग्रेस कोई काम करके तो यह साबित नहीं कर सकती कि वह किसान हितैषी है तो जहां मौका मिलता है कि यह बताने का प्रयास करती है कि सरकार किसान हितैषी नहीं है, सरकार के कारण किसानों को बहुत परेशानी हो रही है। वह किसानों की परेशानी को बढ़ा चढ़ाकर बताती है।
कांग्रेस को जैसे ही पता चलेगा कि सरकार १५ नवंबर से धान खरीदी शुरू करने वाली है तो कांग्रेस खुद को किसान हितैषी बताने के लिए तुरंत बयान जारी करेगी कि १५ नवंबर से धान खरीदी होने से किसानों को नुकसान होगा।सरकार किसानों का पूरा धान नहीं खरीदने के लिए देऱी से धान खरीद रही है।हर साल धान खरीदी में थोडी़ बहुत अव्यवस्था तो होती ही है,जिससे किसानों को परेशानी होती है।खबरे भी छपती हैं, किसान धरना प्रदर्शन भी करते हैं।लेकिन हर साल की तरह धान खरीदी पिछले साल से ज्यादा हो ही जाती है। इस बार भी धान खरीदी को कुछ दिन बचे हैं और कांग्रेस की राजनीति शुरू होगई है कि भूपेश बघेल कह रहे हैं कि २० प्रतिशत किसान अभी धान बेच नहीं पाए हैं,सरकार को धान खरीदी की तारीख बढ़ानी चाहिए।
खबर छप रही है कि ६ दिन में पांच लाख किसानों से धान खरीदी होनी है और तीन दिन छुट्टी हैं इसलिए धान खरीदी मुश्किल हैं यानी सरकार को धान खरीदी कुछ दिन बढ़ानी होगी। सरकार भी देखती है कि तय समय पर धान खरीदी नहीं होगी तो वह भी किसानों को कुछ दिन हर साल मौका देती है।यह भी कांग्रेस को मालूम है फिर भी भूपेश बघेल के बाद कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज मांग कर रहे हैं कि धान की समय सीमा एक माह बढ़ाई जाए।सच यह है कि सरकार की अच्छी व्यवस्था के कारण अब तक ११६ लाख टन धान की खरीदी हो चुकी है।किसानों को २७४१४ करोड़ रुपए का भुगतान भी हो चुका है।यह सरकार की सफलता है क्योंकि कांग्रेस तो यह आरोप लगा रही थी कि सरकार किसानों का पूरा धान नहीं खरीदना चाहती है।
किसानों को धान खरीदी में किसी तरह की दिक्कत न हो इसकी चिंता सरकार धान खरीदी के पहले से करती है और हर साल ऐसी व्यवस्था करती है कि किसानों को कम से कम परेशानी हो, धान बेचने में ज्यादा से ज्यादा सुविधा हो। आफ लाइन मे टोकन की परेशानी होती है तो आफ लाइन भी टोकन की व्यवस्था की गई है। सबसे अच्छी बात तो यह है कि साय सरकार के समय पैसों के भुगतान की समस्या नहीं है। धान बेचते के कुछ दिन बात पैसा खाते में आ जाता है।सरकार ने अवैध धान की बिक्री व भंडारण पर रोक लगाने की व्यवस्था भी इस बार की थी और वह पिछली बार से ज्यादा अच्छी थी लेकिन धान का अवैध धंधा करने वाले नए नए तरीके निकाल ही लेते हैं और धान खपा भी लेते हैं तो यह धान खरीदी तंत्र में शामिल कुछ लोगों के कारण ही संभव हो जाता है। सरकार ने ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई है,.यह अच्छी बात है कि सरकार कहती ही नहीं है कि भ्रष्टाचार रोका जाएगा वह रोकने का पूरा प्रयास भी करती है।
